जनसंघर्ष मोर्चा , मुख्यमन्त्री हो बर्खास्त किया तहसील घेराव

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ए जनसंघर्ष मोर्चा ने किया तहसील घेराव
देहरादून ।देवभूमि खबर। तहसील विकासनगर में जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन ने पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व मेंजनसंघर्ष मोर्चा कार्यकर्ताओं ने ढैंचा बीज घोटाले मामले में त्रिपाठी आयोग की जॉंच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की बर्खास्तगी की मांग को लेकर तहसील घेराव कर राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
इस दौरान जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि मुख्यमन्त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2010 में कृषि मन्त्री रहते हुए 9680 कुंटल ढैंचा बीज की मांग के सापेक्ष 15000 कुंटल ढैंचा बीज की खरीद हेतु आदेश पारित किये तथा उक्त बढ़ी हुई मांग की समुचित प्रक्रिया अपनायें अनुमोदन कर दिया। बीज कृषि उत्पादन मण्डी समिति हरिद्वार अथवा खुले बाजार में उस वक्त 1538ध्.कुंटल की दर पर उपलब्ध के बाद भी बीज मिलीभगत कर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से 3839ध्.कुंटल की दर से निधि सीड्स कारपोरेशन नैनीताल से खरीदा गया ।
जबकि राज्यए केन्द्रीय एजेन्सियों के पास पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध था। निधि सीड्स द्वारा बीज खरीद की रवानगी ट्रकों से दर्शायी गयी जबकि दर्शाये गये अधिकांश ट्रकों की आमद एंट्री व्यापार कर चौकियों में कहीं भी दर्ज नहीं है।
उक्त पूरे घोटाले की लीपापोती में उस समय तत्कालीन कृषि मन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तीन.चार कृषि अधिकारियों के निलम्बन के आदेश पारित किये तथा बाद में यह उल्लेख अधिकारियों के निलम्बन से कृषि योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा उनका निलम्बन निरस्त कर दिया । तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय वर्ष 2013 में एकल सदस्यीय एससी त्रिपाठी जॉंच आयोग गठित कियाए जिसमें ढैंचा बीज घोटाले की जॉंच हेतु निर्देशित किया गया। उक्त मामले की गहन जॉंच के उपरान्त त्रिपाठी जॉंच आयोग द्वारा तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेन्द्र रावत के खिलाफ तीन बिन्दुओं पर कार्यवाही की सिफरिश कीए जिसमें कृषि अधिकारियों का निलम्बन एवं फिर उस आदेश की पलटनाए सचिवए कृषि की भूमिका की जॉंच बिजीलेंस से कराये जाने के मामले में अस्वीकृती दर्शाना तथा बीज डिमांड प्रक्रिया सुनिश्चित किये बिना अनुमोदन करना। इस प्रकार आयोग ने इसे उ0प्र0 ;अब उत्तराखण्डद्ध कार्य नियमावली 1975 का उल्लंघन माना है। आयोग ने त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ सिफारिश की है कि रावत प्रीवैंट एण्ड क्रप्शन एक्ट 1988 के अन्तर्गत आते हैं तथा सरकार उक्त तथ्यों का परीक्षण कर कायवाही करे।
नेगी ने कहा कि उक्त मामले में योजित जनहित याचिकाए जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा सरकार को नोटिस जारी किया गया तथा सरकार के कृषि निदेशक द्वारा उच्च न्यायालय में जमा ब्वनदजमत। पिकअपज में कहीं भी घोटाले के सापेक्ष उक्त तथ्यों का खण्डन नहीं किया गयाए मात्र ।;उपरी अदालत का हवाला दिया गया है कि जनहित याचिका खारिज की जानी चाहिए इत्यादिए इत्यादि।
बड़ी हैरानी की बात है कि आयोग की सिफारिश को तीन बार सदन में रखा जा चुका है जिसमें कमेटी गठित कर गहन परीक्षण करने के निर्देश कैबिनेट ने दिये। अभी हाल ही में कैबिनेट द्वारा इस मामले में त्रिवेन्द्र रावत को क्लीन चिट दी हैए जबकि बिना जाँच कराये आनन.फानन में रावत को फायदा पहुॅंचाने के लिए यह किया गयाए जबकि गम्भीर पहलू यह है कि यह जानते हुए कि मामला उच्च न्यायालय में लम्बित है।
जनसंघर्ष मोर्चा महामहिम राज्यपाल से मांग करता है कि त्रिपाठी जॉंच आयोग की सिफारिश के आधार पर त्रिवेन्द्र रावत को मुख्यमन्त्री पद से तत्काल बर्खास्त करें।
घेराव के दौरान मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, मौ0 असद, दिलबाग सिंह, मौण् इस्लाम, मदन सिंह,ओपी राणा, चौधरी मामराज, सचिन कुमार, सलीम मिर्जा,जयदेव नेगी, भीम सिंह बिष्ट, रवि भट्टनागर, प्रवीण शर्मा पिन्नी,  विमला आर्य, रियासत अली, हाजी जामिन, हाजी फरहाद आलम,  इसरार, जयकृत नेगी, मौण् आशिफ, गजपाल रावत, अरूण थपलियाल आदि थे।

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