नायडू का इस पद पर पहुंचना लोकतंत्र की परिपक्वता प्रदर्शित करता हैः मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम. वेंकैया नायडू का आज राज्यसभा में अभिनंदन करते हुए कहा कि ग्रामीण और आम पृष्ठभूमि से आने वाले नायडू का इस पद पर पहुंचना भारत के संविधान की गरिमा और देश के लोकतंत्र की परिपक्वता को प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने सदन और देशवासियों की तरफ से उन्हें बधाई देते हुए उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा, ‘‘आज 11 अगस्त‍ इतिहास के लिए एक महत्‍वपूर्ण तारीख से जुड़ा हुआ है। आज ही के दिन 18 साल की एक छोटी उम्र वाले खुदीराम बोस को फाँसी के तख्‍त पर चढ़ा दिया गया था। देश की आज़ादी के लिए संघर्ष कैसा हुआ, बलिदान कितने हुए और उसके परिपेक्ष्य में हम सबका दायित्व‍ कितना बड़ा है, इसका यह घटना स्‍मरण कराती है।

 मोदी ने कहा कि हम सबका इस बात की ओर ध्‍यान जरूर जाएगा कि वैंकेया जी नायडू देश के पहले ऐसे उपराष्‍ट्रपति बने हैं, जो स्‍वतंत्र भारत में पैदा हुए हैं। वैंकेया ऐसे पहले उपराष्‍ट्रपति बने हैं, जो शायद अकेले ऐसे हैं, जो इतने सालों तक इसी परिसर में, इन सबके बीच में पले, बढ़े हैं। शायद इस देश को पहले ऐसे उपराष्‍ट्रपति मिले हैं, जो इस सदन की हर बारीकी से परिचित हैं। सदस्‍यों से ले करके समितियों से, समितियों से ले करके सदन तक की कार्रवाई से, स्‍वयं उस प्रक्रिया से निकले हुए यह पहले उपराष्‍ट्रपति देश को प्राप्‍त हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंदुस्‍तान के संवैधानिक पदों पर वो लोग बैठे हैं, जिनकी पार्श्वभूमि गरीबी की है, गांव की है, सामान्‍य परिवार से है। पहली बार देश के सभी सर्वोच्‍च पदों पर इस पृष्ठभूमि के व्‍यक्तियों का होना अपने आप में भारत के संविधान की गरिमा और भारत के लोकतंत्र की परिपक्वता को प्रदर्शित करता है।
 मोदी ने कहा कि वैंकेया नायडू का व्‍यक्तित्‍व और कार्य भी है। उनकी तुकबंदी से तो लोग भलीभांति परिचित हैं। और कभी-कभी वो जब भाषण करते हैं तो और वो जब तेलुगू में करते हैं तो ऐसा लगता है कि सुपर फास्ट चला रहे हैं। लेकिन ऐसा तब संभव होता है, जब विचारों के अंदर स्‍पष्‍टता हो, लोगों के साथ जुड़ाव हो। शब्‍दों के खेल किसी के मन मंदिर को नहीं छू सकते हैं। लेकिन श्रद्धाभाव से पनपी हुई विचारधाराओं के आधार पर अपनी प्रतिबद्धता और दूरदृष्टि के साथ चीजें निकलती हैं तो जन हृदय को अपने आप छू जाती हैं। नायडू के जीवन में यह देखा गया है, पाया गया है।
 उन्होंने कहा, ”यह भी सही है, ग्रामीण विकास के अंदर आज कोई भी ऐसा सांसद नहीं है, जो एक विषय पर सरकार से बार-बार आग्रह न करता हो। चाहे सरकार डॉक्‍टर मनमोहन सिंह जी के नेतृत्‍व की हो, चाहे वो सरकार मेरे नेतृत्‍व की हो। सांसदों की एक एक मांग लगातार रहती है और वो अपने क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क के लिए कार्य के लिए है।’’ मोदी ने कहा, ”हम सभी सांसदों के लिए गर्व की बात है कि देश को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की कल्‍पना, उसकी योजना, यह तोहफा अगर किसी ने दिया तो यह हमारे उपराष्‍ट्रपति जी ने दिया, आदरणीय वैंकेया जी ने दिया। यह चीजें तब निकलती हैं जब गांव के प्रति, गरीब के प्रति, किसान के प्रति, दलित के प्रति, पीड़ित शोषित के प्रति अपनत्व होता है, उनको कठिनाइयों से बाहर निकालने का संकल्‍प होता है।’’
 होंने कहा, ‘‘आज जब उपराष्‍ट्रपति पद के रूप में वैंकेया जी हमारे बीच में हैं, इस सदन में हम सबकी एक कठिनाई रहेगी, क्‍योंकि बार में से कोई वकील अगर न्यायाधीश बन जाता है तो शुरू-शुरू में अदालत में उसके साथ नीचे बार के सदस्य जब बात करते हैं, तो जरा अटपटा लगता है कि कल तो यह मेरे साथ खड़ा रहता था, मेरे साथ बहस करता था, और आज यहां मैं इसको कैसे— तो कुछ पल हम सबके लिए भी, खासकर इस सदन के सदस्‍यों के लिए जिन्‍होंने इतने साल उनके साथ एक दोस्‍ताना रूप में काम किया है और जब इस पद पर बैठे हैं तो हमने भी… और हमारे लोकतंत्र की विशेषता है कि व्‍यवस्‍था के अनुकूल हम अपनी कार्यशैली को भी बनाते हैं।’’
 मोदी ने कहा, ”मुझे विश्‍वास है कि भले ही हमारे बीच से इतने लम्‍बे समय से राज्‍यसभा के सदस्‍य रह करके, हर बारीकी से निकले हुए, एक अनुभवी व्‍यक्ति, उपराष्‍ट्रपति और इस सदन के सभापति के रूप में जब हम लोगों का मार्गदर्शन करेंगे, हमें दिशा देंगे, इसकी गरिमा को और ऊपर उठाने में उनका योगदान बहुत बड़ा होगा, मुझे पूरा विश्‍वास है। एक बहुत बड़े बदलाव के संकेत मैं देख रहा हूं। और वो अच्‍छे के लिए होंगे, अच्‍छाई के लिए होंगे।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज जब वैंकेया जी इस गरिमापूर्ण पद को ग्रहण कर रहे हैं तब, मैं उसी बात को स्‍मरण करना चाहूंगा ‘अमल करो ऐसा अमन में, अमल करो ऐसा अमन में, जहां से गुजरे तुम्‍हारी नज़रें, उधर से तुम्‍हें सलाम आए।’ और उसी को जोड़ते हुए मैं कहना चाहूंगा ‘अमल करो ऐसा सदन में, जहां से गुजरें तुम्‍हारी नज़रें, उधर से तुम्‍हें सलाम आए।’’

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