निजता के अधिकार को मूलभूत अधिकार घोषित करने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत : राहुल गांधी

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निजता के अधिकार को मूलभूत अधिकार घोषित करने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि यह प्रत्येक भारतीय की जीत है तथा इसके जरिये फासीवादी ताकतों को पूरी तरह से नकार दिया गया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय के इस फैसले को प्रत्येक भारतीय की जीत बताया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के निर्णय से फासीवादी ताकतों पर करारा प्रहार हुआ है। निगरानी के जरिये दबाने की भाजपा की विचारधारा को मजबूती से नकारा गया है।’’ उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते हैं जिसमें निजता के अधिकार को व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा का मूलभूत अंग बताया गया है।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का सर्वसम्मति से आया फैसला केन्द्र के लिए झटके के समान है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज दिया गया निर्णय एक ऐतिहासिक फैसला है तथा भारत के संविधान के अस्तित्व में आने के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा दिये गये सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के फैसले के कारण अनुच्छेद 21 को एक नयी भव्यता मिली है।” पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि निजता वैयक्तिक स्वतंत्रता के मूल में है तथा यह स्वयं जीवन का अविभाज्य अंग है।

चिदंबरम ने जीवन एवं वैयक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर अनुच्छेद 21 के तहत आधार की व्याख्या के सरकार के रूख की आलोचना की और आरोप लगाया कि उसके रूख में अस्थिरता है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि केन्द्र ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कहा था कि निजता का कोई मूलभूत अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से सरकार को झटका लगा है। चिदंबरम ने कहा कि आधार को एक प्रशासनिक उपाय के रूप में विचारित किया गया था ताकि लक्षित लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचना सुनिश्चत हो सके।

उच्चतम न्यायालय ने देश के प्रत्येक नागरिक को प्रभावित करने वाले अपने आज के ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया। प्रधान न्यायाधीश जे.एस. खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसले में कहा कि ‘‘निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पूरे भाग तीन का स्वाभाविक अंग है।’’ पीठ के सभी नौ सदस्यों ने एक स्वर में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया।

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