बहन की राखी को भाई की कलाई का इंतजार

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देहरादून, ।देवभूमि खबर।। सोमवार को गांव में हर कोई राखी के त्यौहार पर खुश था कहीं कोई अपनी बहन से राखी बंधवाने के लिए उसके घर पहुंच रहा था तो कहीं कोई बहन अपने भाई के घर जाकर इस त्यौहार को मना रही थी। लेकिन इन खुश लोगों के बीच एक छोटी सी दुकान में एक बहन ऐसी थी जिसके चेहरे पर न तो इस त्यौहार की खुशी थी और न ही कोई उत्साह। अब आप जानना चाहेगें इस महिला का परिचय इस महिला का नाम है शशि और यह महिला उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ की बहन हैं। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है कि रक्षाबंधन पर यह शशि पहली बार उदास हुई हो पिछले 27 सालों से जिस बहन की राखी को भाई की कलाई का इंतजार हो वह भले कैसे इस त्यौहार पर खुश रह सकती हैं। वैसे तो अजय बिष्ट जो अब योगी आदित्यनाथ है की तीन बहनें हैं। जिनमें से एक शशि तीसरे नंबर की बहन हैं। जो ऋषिकेश से ऊपर नीलकंठ पर्वत पर एक दुकान में सामान बेच अपने परिवार का गुजरा करती हैं।
शशि ने बताया कि वह पिछले 27 सालों से अपने भाई से नहीं मिली हैं। रक्षाबंधन पर वे पिछले 27 सालों से वह इसी तरह से उनके दिल्ली वाले पते पर राखी भेज रही हैं लेकिन आजतक भाई का कोई जवाब नहीं आया है। उन्हें तो यह भी नहीं पता कि उन्हे उनकी राखी मिलती भी है या नहीं। शशि बताती है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अपने भाई योगी आदित्यनाथ को पौड़ी गढ़वाल में चुनाव कैंपेन के दौरान देखा था लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई थी।
आज से 27 साल पहले जब योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड के पंचूर गांव में रहते थे तो पूरा परिवार हर त्यौहार को एक साथ मिलकर मनाता था। योगी की बहन शशि का कहना है कि बचपन में रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन वह अपने चारों भाइयों को सामने बैठाकर राखी बांधती थीं और उपहार के तौर पर योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय बिष्ट उनसे यही कहा करते थे कि अभी तो फिलहाल में कुछ नहीं कमा रहा हूं, लेकिन जब बड़ा हो जाऊंगा तो तुम्हें खूब सारे उपहार दूंगा। अजय बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ बचपन में राखी के त्यौहार पर अपने पिता से पैसे लेकर अपनी तीनों बहनों को दिया करते थे। शशि बताती हैं कि पैसे देने के बाद योगी आदित्यनाथ पिता के चले जाने के बाद उनसे वही पैसे दोबारा मांगा करते थे।
बचपन की यादों को याद करके योगी की बहन शशि की आंखों में आंसू आज भी आ जाते हैं। शशि हमसे बातें करते हुए कई बार भावुक भी हो गईं थी। उनका कहना है कि इस त्यौहार पर जब वह अपने भाई-बहनों को याद करती हैं तो हर बार रोती हैं। इसके साथ ही जब उन्हें पहली बार मालूम हुआ कि उनका भाई संत बन गया है तो उन्हें बेहद दुख हुआ। वह गांव में और दुकान पर आने वाले हर साधु-संतों को उसी तरह से देखने लगी थीं कि कहीं उनका भाई उनसे मिलने तो नहीं आया है।

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