सृजन घोटाले के दोषी को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगेः नीतीश

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भागलपुर—पटना। बिहार के भागलपुर जिला में एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा करोड़ों रूपये की सरकारी राशि के कथित गबन के एक मुख्य आरोपी की बीती रात्रि मौत के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज कहा कि वर्षों से जारी यह बड़ा घपला जिसकी जानकारी नहीं हो पायी थी, यह आंख खोलने वाला है और इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। भागलपुर से प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वयंसेवी संस्था सृजन महिला सहयोग समिति द्वारा किए गए इस 950 करोड़ रूपये के गबन के मुख्य आरोपियों में से एक और वहां की कैम्प जेल में बंद कल्याण विभाग के नाजिर महेश मंडल की बीते देर रात्रि जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कालेज अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने महेश की मौत की पुष्टि करते बताया कि वह पूर्व से ही वे रोगग्रस्त थे। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। गत 15 अगस्त को गिरफ्तार मंडल की किडनी खराब थी और वे डायलिसिस पर थे। बीती रात्रि मंडल की तबियत खराब होने पर उन्हें भागलपुर कैंप जेल से उपचार के लिए जवाहर लाल नेहरु मेडिकल कालेज अस्पताल लाया गया था। मंडल के परिजनों ने उनका समय पर डायलिसिस नहीं कराए जाने को एक साजिश बताया है।
बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने मंडल की मौत के मामले को उठाते हुए इसको लेकर राज्य सरकार पर आज हमला करते हुए आरोप लगाया कि उनकी हत्या घोटाले की सच्चाई को दबाने के लिए सरकार में शामिल लोगों द्वारा किया गया। बिहार विधानसभा परिसर में अपने बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेजप्रताप के साथ पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी ने इस घोटाले को मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाला से भी बड़ा बताया।
बिहार विधान परिषद सदस्य और तेजस्वी की मां राबड़ी देवी ने आरोप लगाया कि 2005 से ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और सुशील कुमार मोदी उपमुख्यमंत्री थे। उन्होंने सृजन घोटाला नीतीश और सुशील की देखरेख में होने तथा इनके द्वारा जानबूझकर कराएं जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी जानकारी इन लोगों को पहले से ही थी। बिहार विधान परिषद के बाहर राबड़ी ने इस मामले में आरोपी मंडल की मौत की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘नीतीश और सुशील को शर्म आनी चाहिए। व्यापमं घोटाला जो हुआ था उससे भी बढ़कर यह बड़ा घोटला है। जनता इन्हें माफ नहीं करेगी।’’
भागलपुर के तर्ज पर प्रदेश के ​हर जिलों में भी घोटाला होने का दावा करते हुए राबड़ी ने कहा कि हम लोगों की मांग है कि जब तक नीतीश और सुशील अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक इसकी निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है। इसकी जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की अनुशंसा कर चुके हैं। सत्ता के गलियारे में आज उस पत्र की चर्चा रही जो वर्ष 2002 में गलपुर के सहकारी विभाग के कर्मचारी ने अपने विभागीय मुख्यालय को लिखा गया था जिसमें सृजन संस्थान में हुई अनियमितता की चर्चा की गयी है। बिहार में 2002 में राजद और कांग्रेस सत्ता में थी और उस समय राबड़ी मुख्यमंत्री थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि वर्षों से जारी यह बड़ा घपला आंख खोलने वाला है, जिसकी जानकारी नहीं हो पायी थी। इस मामले की सीबीआई से जांच की अनुशंसा की गयी है और इसमें संलिप्त व्यक्ति कोई कितना भी ताकतवर हो किसी को नहीं बख्शा जाएगा और निश्चित तौर पर कानून के अनुसार सजा मिलेगी। नीतीश ने कहा कि दोषी को पाताल से ढूंढ निकाला जाएगा और गबन की गयी राशि किसी भी कीमत पर वसूली जाएगी।

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