“हमारे समय में मानवता के लिए वेदों की व्यापक प्रासंगिकता है” : श्री एम. वेंकैया नायडू

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भारत के उप-राष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि वेद विश्व शांति, वैश्विक भाईचारा, और सभी के लिए कल्याण का प्रसार करते हैं।
“विश्व वेद सम्मेलन” नामक वेदों पर आधारित विश्व सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि मानवता की दिशा में वेदों की प्रासंगिकता काफी अधिक है। यजुर्वेद बताता है कि वेदों के ज्ञान का अर्थ संपूर्ण मानवजाति का कल्याण है। उन्होंने आगे कहा कि वेदों का संबंध किसी जाति अथवा धर्म से नहीं है।
भारत में पुरातन ज्ञान और दर्शन के शुरुआती कार्यों के रूप में वेदों का उल्लेख करते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, विचार एवं दर्शन की जड़ें वेदों में निहित हैं। उन्होंने कहा कि वेद ज्ञान का स्रोत हैं और ये अर्थशास्त्र, समाज, शिक्षा और राजनीति के क्षेत्र में आधुनिक बनाने और उच्च नैतिक मानकों को बनाए रखने में हमारा मार्गदर्शन करते हैं।
वैदिक दर्शन बताता है कि सत्य, अहिंसा, धैर्य, तपस्या और आध्यात्मिक उत्थान मानव जीवन के आधार हैं। वेद धार्मिक सौहार्द, समानता और राष्ट्र की प्रगति का संदेश देते हैं। ऋग्वेद के 5.60.5 पद्य का उद्धरण देते हुए श्री वेंकैया नायडू ने कहा कि वेदों के अनुसार समाज में कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता।
उप राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माता और आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने संसार को “वेदों की ओर वापसी” का संदेश दिया। इसे सुप्रसिद्ध चिंतक मैक्स मूलर ने अनुमोदित किया। सुप्रसिद्ध दार्शनिक और नोबल पुरस्कार विजेता मौरिस माटरलिक ने कहा था कि वेद ही सभी ज्ञान का एकमात्र और अतुलनीय स्रोत हैं।

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