राज्य की परम्परागत कृषि को राज्य के स्कूलो में पाठ्य सामग्री का हिस्सा बनायेंगे :उनियाल

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देहरादून।देवभूमि खबर। पिछले एक सप्ताह से देहरादून में माउण्ट वैली डेवलपमेंट ऐशोसियसन द्वारा आयोजित ग्रीन एक्शन सप्ताह के रूप मेजनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सबके लिए जैविक खेती, जैविक आहार जैसे स्लोगन को लेकर अभियान ने गुरू राम राय पीजी कॉलेज, दयानन्द वूमेन ट्रेनिंग कॉलेज, राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजपुर में स्कूली बच्चों के साथ अभियान ने सतत् पोषण उपभोग जैसे विषय पर मौजूदा रासायनिक तरीके से तैयार हो रही खाद्य सामग्री पर वृहद चर्चा की है। इस दौरान अभियान ने प्रेस क्लब में एक दिवसीय विचार गोष्टी का आयोजन कियाहै। माउण्ट वैली डेवलपमेंन्ट ऐशोसियसन के तहत आयोजित इस विचार गोष्टी में पंहुचे कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उनकी हर सम्भव कोशिश रहेगी कि वे राज्य की परम्परागत कृषि को राज्य के स्कूलो में पाठ्य सामग्री का हिस्सा बनायेंगे।
कार्यक्रम के मुख्यअथिति कृषि मंत्री ससुबोध उनियाल ने कहा कि वे जल्दी ही राज्य में एकीकृत कृषि विकास कार्यक्रम के लिए एक विशेष योजना बना रहे हैं जिसका फायदा किसानो को मिलने वाला है। कहा कि वे अपने स्तर से यह प्रयास कर रहे हैं कि राज्य सरकार राज्य के किसानो को एक मुश्त बजट दे ताकि पहाड़ में आपदाग्रस्त किसान राहत की सांस ले सके। इस दौरान विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक वृजमोहन शर्मा ने कहा कि आज हम लोग वर्तमान के खाद्य सामग्री के कारण अजैविक हो गये है। इसलिए हमारा सर्वाधिक खर्च और समय चिकित्सीय परिक्षणों में जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्या हम लोग फिर से अपने पंरम्परागत खान-पान में नहीं आ सकते। यदि आ सकते हैं तो हमें जैविक खेती की ओर लौटना होगा। राजस्थान से आये कट्स संस्था के अमरदीप सिंह ने कहा कि जिस तरह से देश में हरीत क्रान्ती के बाद खाद्य पदार्थो में उत्पादन बढा है उसी गति से देशभर में इसके कुप्रभाव भी अस्वस्थता के रूप में सामने आ रहे है।इसका हस्र यह हुआ कि जब भी उपभोगक्ता उपभोग करने वाली चीजों को प्राप्त करता है तो उसे अजैविक ही प्राप्त होता है। इसलिए कहा जा सकता है कि जैविक सामग्री को अजैविक व रासायनिक पदार्थो ने तहस-नहस कर दिया है। उनका सुझाव था कि लम्बे समय तक स्वस्थ रहने के लिए जैविक पदार्थो को ही स्तेमाल करना होगा।
बीज बचाओ आन्दोलन के विजय जड़धारी ने कहा कि अजैविक रूप से तैयार हो रहा बीज आज धरती का शोषण तीव्र गति से कर रहा है। यही वजह है कि मौजूदा समय में पानी र्प्यावरण के खतरे हमारे सामने खड़े हो गये है। जहां तक जैविक खेती की बात है उसके लिए पशुपालन का होना आवश्यक है। उन्होने उतराखण्ड जैसे पहाड़ी राज्य में जैविक खेती के लिए बैल का होना जरूरी बताया क्योंकि इस पहाड़ी राज्य में मशीनो से भी खेती करनी अजैविक ही माना जाता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वे इस पहाड़ी राज्य के किसानो को वैल हेतु सब्सिडी प्रदान करें। ताकि मझौले किसान फिर से खेती से जुड़ सके।
इस दौरान इस अभियान से जिन छात्र-छात्राओं ने चित्रकला, निबन्ध, नारा लेखन में हिस्सा लिया उन्हे माउण्ट वैली डेवलपमेंट ऐशोसियसन और कट्स इन्टरनेशनल संस्था द्वारा प्रसस्ती पत्र और स्मृति चिन्ह से लगभग 18 प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। विचार गोष्ठी में सेवानिवृत प्रमुख सचिव विभापुरी दास, दयानन्द वूमेन ट्रेनिंग कॉलेज की आरती दिक्षित, हिमात्थान सोसायटी की मल्लविका चौहान, माउण्ट वैली डेवलप ऐशोसियसन के निदेशक अवतार नेगी ने विचार गोष्ठी को संबाधित किया और कार्यक्रम का संचालन सर्वोदय विचारक व लेखक बीजू नेगी ने किया।

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