बीआईएस कानून 2016 भारत में मानकों के विकास और अंतरण की रूपरेखा निर्धारित करता है

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ओडिशा।पीआईबी।बीआईएस कानून 2016 भारत में मानकों के विकास और अंतरण की रूपरेखा निर्धारित करता है। देश में अंतरित किये जाने वाले उत्‍पादों, प्रक्रियाओं, सेवाओं को उच्‍च गुणवत्‍ता वाला तथा उपभोक्‍ता और उत्‍पादकों की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला होना चाहिए। बीआईएस की महानिदेशक सुश्री सुरीना राजन ने  ओडिशा में 12वें क्षेत्रीय मानक सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। इसका आयोजन भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई) ने ओडिशा सरकार के सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम विभाग, भारतीय मानक ब्‍यूरो (बीआईएस), नेशनल एक्रीडीटेशन बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशल बॉडीज (एनएबीसीबी), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार अनुसंधान केन्‍द्र (सीआरआईटी) के सहयोग से किया था।
सुश्री सुरीना राजन ने कहा कि राष्‍ट्रीय मानक संगठन के रूप में, बीआईएस न केवल निर्यात के लिए बल्कि देश के भीतर भी उपभोक्‍ताओं को गुणवत्‍ता और मानक का भरोसा देने के लिए प्रतिबद्ध है। देश में जो कुछ आयात होता है वह भारतीय उपभोक्‍ताओं के लिए सुरक्षित भी होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि मानकीकरण एक आंदोलन है, इसे गुणवत्‍ता के मामले में नहीं फंसना चाहिए। मानकों के लिए निरंतरता और स्‍मार्ट सेवाएं अगला पड़ाव है, जो बीआईएस भविष्‍य में मानकीकरण के लिए तैयार करने का प्रयास कर रहा है।
वाणिज्‍य मंत्रालय में अपर सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा कि जिंसों में वैश्विक व्‍यापार का मूल्‍य 18 खरब अमेरिकी डॉलर है और सेवाओं का 5 खरब अमेरिकी डॉलर का व्‍यापार होता है। इस समय भारत 2.6 खरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था है। अपनी हिस्‍सेदारी बढ़ाने के लिए भारत को कड़ाई से मानकों का पालन करना चाहिए। नया उपभोक्‍ता कानून उत्‍पाद को वापस मंगाने की इजाजत देता है। यह स्‍वागत योग्‍य कदम है। उत्‍पाद देनदारी कानून, जिसकी निर्माताओं पर अधिक जिम्‍मेदारी है, उसे लागू किये जाने की जरूरत है। प्रत्‍येक साझेदार के अलग-अलग हित होते हैं। मानक इन हितों को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।
ईआईसी के अध्‍यक्ष और वाणिज्‍य विभाग में संयुक्‍त सचिव संतोष सारंगी का मानना था कि विश्‍व व्‍यापार के बदलते परिदृश्‍य में गुणवत्‍ता के बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। उपभोक्‍ता अधिक से अधिक जानकारी चाहता है। आज कोई भी मुनष्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा के मुद्दे की अनदेखी नहीं कर सकता, अत: मानकों का पालन अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।
ओडिशा के एसएसपीईडी, महिला और बाल विकास तथा एमएसएमपी मंत्री प्रफुल्‍ल सामल ने अपने संबोधन में कहा कि एमएसएमई को मानक बनाए रखने की आवश्‍यकता है।
ओडिशा सरकार में एमएसएमई विभाग के अपर मुख्‍य सचिव श्री एल.एन. गुप्‍ता ने कहा कि गुणवत्‍ता और मानक व्‍यवसाय के लिए बेहद जरूरी है। एमएसएमई को मानक अपनाने की आवश्‍यकता है। हमारे करीब 3.7 लाख एमएसएमई, 300 निर्यातक और 356 र्स्‍टाट अप हैं, जिन्‍हें सही मानकों को अपनाने के लिए जागरूक करना जरूरी है, ताकि उनका कारोबार और लाभ बढ़ सके।
एनएबीसीबी के अध्‍यक्ष श्‍याम सुंदर बांग ने कहा कि भारत में उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। गुणवत्‍ता को लेकर उपभोक्‍ताओं की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं, क्‍योंकि विश्‍व स्‍तर पर बाजार आपस में जुड़ रहे हैं जिसने भारतीय उद्योग के अनुपालन नजरिये में सुधार किया है। हमें तीसरे पक्ष के प्रमाण पत्र व्‍यवस्‍था शुरू करनी चाहिए और अनुपालन मूल्‍यांकन के लिए एक मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना चाहिए।

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