व्‍यापार क्षेत्र को विकसित करके छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने पर अपना ध्‍यान केंद्रित कर रही है

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केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री,  राधा मोहन सिंह ने नई दिल्‍ली में लघु कृषक कृषि व्‍यापार संघ के प्रबंधन बोर्ड की 22वीं बैठक की अध्‍यक्षता की। श्री सिंह ने एसएफएसी के तहत संचालित होने वाले कार्यकलापों के बारे में बताते हुए कहा कि एसएफएसी एक विशेष प्रकार की समिति है जो कृषि व्‍यापार क्षेत्र को विकसित करके छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने पर अपना ध्‍यान केंद्रित कर रही है ।
राधा मोहन सिंह   ने कहा कि एसएफएसी से संबंधित वीसीए स्‍कीम पर कृषि उद्यमियों से उत्‍साहवर्धक प्रतिक्रिया मिल रही है और इससे संबंधित अधिकांश मामले पाइपलाइन में हैं। उल्‍लेखनीय है कि वित्‍तीय संस्‍थानों द्वारा वीसीए योजना के तहत सभी कृषि व्‍यापार इकाईयों से संबंधित प्रस्‍तावों की सिफारिश अधिसूचित एसएफएसी को दी गई है। श्री सिंह ने कहा कि यह प्रचार एवं जागरूकता शिविरों के प्रयासों का नतीजा है। उन्‍होनें उल्‍लेख किया कि इन शिविरों का आयोजन संपूर्ण भारत में वीसीए स्‍कीम को प्रचारित करने के प्रयोजनार्थ एसएफएसी द्वारा किया गया है।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा एसएफएसी ने एफपीओ, बैंकरों/ नाबार्ड, लाइन विभागों, एफपीओ के सदस्‍यों और आरआई की बेहतर रूपरेखा प्रस्‍तुत करने और वीसीए स्‍कीम को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए राष्‍ट्र व्‍यापी प्रचार-प्रसार और जागरूकता कार्यक्रम चलाया है।
मत्स्य पालन क्षेत्र में भी एफपीओ शुरू किया जा रहा है और प्रमुख मछली उत्पादक राज्यों में 21 मछली किसान निर्माता संगठनों (एफएफपीओ) के गठन से जुड़े एक पायलट परियोजना को प्रस्तुत किया गया है। पूर्वात्‍तर क्षेत्र के लिए लघु किसान कृषि व्‍यापार मंच (एसएफएसी) और मसाला बोर्ड निमित्‍त पूर्वात्‍तर परिषद (एनईसी) के साथ मिलकर सिक्‍क्‍िम और अरूणाचल प्रदेश में मसाला आधारित एफपीसी गठित करने कि योजना पर कार्य कर रहे हैं ।
श्री सिंह ने उल्‍लेख किया कि एसएफएसी ने एफपीसी के निदेशक मंडल और कार्यकारी अधिकारी के लिए आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम; एफपीसी के व्‍यावसायिक संचालन; केन्‍द्र/ राज्‍य सरकार के संयुक्‍त कार्यक्रमों के जरिए संबंधित अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण; मत्‍स्‍य किसान उत्‍पादक संगठनों का संवर्धन और ईपीसी से संबंधित उर्वरक डीलरशीप जैसी कई नई पहलें शुरू की हैं ।
एसएफएसी ने दिल्‍ली किसान मंडी के रूप में राजधानी में एक विशेष मंच उपलब्‍ध कराया है। यह सितंबर, 2014 से प्रचालनरत है और अक्‍तूबर, 2017 की स्‍थिति के अनुसार दिल्‍ली किसान मंडी के जरिए 23347.419 मीट्रिक टन ताजे उत्‍पादों का विक्रय किया गया है जिसकी कीमत 3482.549 लाख रूपये है।

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