कम्प्युटर की सुरक्षा को खतरा और बचाव

कम्प्युटर की सुरक्षा का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ लोग जो हमेशा कुछ अलग करना चाहते है वो हमारे  कम्प्युटर को नुकसान पहुचाने, हमारे  महत्वपूर्ण जानकारियो  को चुराने, या सिर्फ मानसिक रूप से  परेशान करने के लिये नये-नये  तरीके इजाद कर रहे है। अगर हम ऑनलाईन भी जाते है तो खतरा कई गुना बढ़ जाता  है। इन खतरों से निपटने के लिये सबसे पहले तो हमे इन खतरों की जानकारी होनी चाहिये। उसके बाद उन खतरों से बचाव के तरीके  मालूम होने चाहिये। सबसे अंत मे अगर कुछ दुर्घटना हो गई तो उससे निकलने का रास्ता मालूम होना चाहिये। तो अब हम सबसे पहले जानते है कि कम्प्युटर को कितने तरह के खतरे होते है।

       कम्प्युटर वायरस : वायरस कम्प्युटर के लिये सबसे प्रसिद्ध खतरों में से एक है। यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो बिना हमारी अनुमति के  कम्प्युटर  के काम करने का तरीका अपने हिसाब से बदल देता है। जैविक वायरस की तरह यह भी अपने प्रतिकृति बनाता है और शायद इसीलिये इसका नाम वायरस है। जिस कम्प्युटर मे यह होता है उसमे अपनी प्रतिकृति के द्वारा अपनी संख्या बढ़ाता जाता है और कम्प्युटर के अंदर चल रहे प्रासेस को नुकसान पहुँचाता है।

स्पायवेयर :  जैसा कि अपने नाम से ही विदित हो रहा है, ये ऐसे कम्प्युटर प्रोग्राम होते है जो बिना आपकी अनुमति के आप के कम्प्युटर में चुपचाप पड़े रहते है और अपने निर्माता के पास आपकी जानकारियों को चुरा कर भेजते रहते है। जितनी ज्यादा आप की जानकारी इसके निर्माता के पास रहेगी आप के उपर उतना ज्यादा खतरा रहेगा। इसके अंतर्गत बहुत तरह के प्रोग्राम आते है जो की आगे दिये गये  है।

हैकर : ये वो प्रोग्रामर होते हैं जो इन कम्प्युटर के खतरों के निर्माता होते हैं। ये तरह-तरह में मैलवेयर के द्वारा हमारे कम्प्युटर की सुरक्षा को भेद कर उसमे प्रवेश करते हैं और हमारे जानकारियों को चुरा लेते है, बदल देते है या नष्ट कर देते है। इनका सबसे बढ़िया हथियार है इंटरनेट पर उप्लब्ध साफ्ट्वेयर और वो लोग जो इंटरनेट से मुफ्त के साफ्टवेयर डाउनलोड करते है। उन साफ्टवेयर में ये अपने स्पाय छिपा देते है और ये आसानी से हमारे कम्प्युटर मे अपनी पहुँच बना लेता है। चूंकी हमने असली साफ्टवेयर नही खरीदा है इसलिये हम इसे इंटरनेट से अपडेट भी नहीं करते है जिससे ये स्पाय बहुत दिनों तक अपना काम करता रहता हैं।

फ़िशिं : आज की आनलाईन वित्तीय लेनदेन के जमाने मे यह एक बहुत ही खतरनाक हथियार है। फ़िशिंग भी कुछ असली फ़िशिंग जैसा ही होता है। इसमे आपको फर्जी ई-मेल या फोन कॉल के जरिये ठगा जाता है। इसमे हमारे पास कहीं से ई-मेल  या  फोन कॉल आता है जो कि अपने को किसी फोन कम्पनी, बैंक, या अन्य संस्था से बताता है और किसी ईनाम या किसी अन्य चीज का लालच दे कर  हमसे हमारे महत्वपूर्ण जानकारियों जैसे की बैंक का विवरण, पारिवारिक विवरण, ई-मेल पासवर्ड इत्यादि को प्राप्त करना चाहता है। बाद मे इन जानकारियों की सहायता से हमे बड़ा नुकसान पहूँचा सकता है।

ट्रोजन: यह एक तरह का स्पायवेयर है इसके अंदर अपने आप को एंटीवायरस प्रोग्राम से बचा लेने  की क्षमता होती है। यह हमारी बैंकिंग डाटा को चुराता है और अपने निर्माता के पास भेज देता है।

वार्म : यह एक प्रकार का प्रोग्राम होता है, जिससे कम्प्युटर को कोई खास खतरा नहीं होता है इसे सिर्फ फैलने के लिये बनाया जाता है। ये कुछ ही समय में बहुत सारे कम्प्युटर में फैल जाता है इससे कम्प्युटर को सिर्फ इतना ही खतरा होता है कि ये हमारे कम्प्युटर के हार्डडिस्क को खुद की प्रतिकृति बना कर भर देता है और नेटवर्क में ट्रैफिक की बाढ़ ला देता है, जिससे नेटवर्क धीमा हो जाता है।

स्केयरवेयर: यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो यह दिखाता है कि आपके कम्प्युटर मे हजारो वायरस आ गये है। जबकी ऐसा  कुछ नही होता है। इसका मक्सद एक बेकार सा एंटीवायरस साफ्टवेयर बेचना होता है जो किसी काम का नहीं होता है। बस ये एंटीवायरस उस प्रोग्राम को  बंद कर देगा बदले में आप से पैसे ले लेगा।

की-लॉगर : यह हार्डवेयर या साफ्टवेयर दोनो हो सकता है। यह आप के कम्प्युटर के हर की-स्ट्रोक को रिकार्ड करता रहता है। इसकी सहायता से  हमारे लॉगिन और पासवर्ड को बहुत आसानी से चुराया जा सकता है। इसका हार्डवेयर वर्जन की-बोर्ड और सी.पी.यू. के बीच में लगा होता है जिसमे की सारे की-स्ट्रोक सुरक्षित रहते है।

एडवेयर: यह एक ऐसा प्रोग्राम होता है जो कि विज्ञापन से सम्बंधित बहुत सारे विंडो लगातार खुलते रहते हैं। बार-बार हर एक को आप को बंद करना पड़ता है। कभी-कभी ये विज्ञापन वयस्क भी हो सकते  है। ये खतरनाक नहीं होते मगर परेशान कर देते  हैं।

फार्मिंग: फार्मिंग भी फिशिंग का एक प्रकार है मगर इसमे दूसरी तकनिक का उपयोग किया जाता है।  ये दो तरह के होते हैं। पहला है डी.एन.एस. प्वायजनिंग। इसमे हमारे कम्प्युटर के डी.एन.एस. कैच को इस तरह से बदल दिया जाता है कि जब हम कोई साईट खोलेंगे तो हैकर द्वारा सेट की गई साईट खुलेगी।  यही काम एक दूसरी विधी से करते है जिसमे कि हमारी होस्ट फाईल को बदल देते हैं।

कम्प्युटर के सुरक्षित उपयोग के उपाय :

  •      अपने कम्प्युटर को हमेशा अपडेट रखें। आपरेटिंग़ सिस्टम का आटोमैटिक अपडेट हमेशा ऑन रखें।
  •     अपने कम्प्युटर को सुरक्षित रखने के लिये एक सही एंटीवायरस साफ्टवेयर का उपयोग करें और उसे हमेशा अपडेट रखें। थोड़े-थोड़े दिन के अंतराल पर पूरा कम्प्युटर स्कैन करें। हमारी निर्माणी मे ट्रेंड माईक्रो आफिस स्कैन नामक एंटीवायरस प्रोग्राम का सरवर उपलब्ध है जो कि नेटवर्क में उपलब्ध सारे  कम्प्युटरो को स्वत: अपडेट करता रहता है  और खुद को आयुध निर्माणी बोर्ड मे लगे सरवर से अपडेट करता रहता  है।
  •    अपने कम्प्युटर को हमेशा कठिन पासवर्ड से सुरक्षित रखे जिसे कोई खोल ना सके। और अपना पासवर्ड किसी से ना शेयर करे।
  •         कुछ-कुछ अंतराल पर अपने महत्वपूर्ण फाईलों का बैकअप लेते रहे।
  •         अपने कम्प्युटर को लॉगिन अवस्था में कभी ना छोड़े। अगर कही जाना पड़े तो लॉक या लॉग ऑफ कर दे।
  •         अंजान ईमेल ना खोले ना ही इसके साथ जुड़े फाईलो को खोले।
  •         अपने कम्प्युटर के फायरवाल को कभी भी ऑफ ना करे।
  •         इंटरनेट से अनाधिकृत साफ्टवेयर ना डाउनलोड करे।
  •         सोशल नेटवर्किंग साईट का उपयोग बहुत सावधानी से करे। अपनी निजी जानकारी शेयर करने से पहले अच्छी तरह सोच विचार कर ले।
  •         जबतक बहुत जरूरी ना हो एड्मिनिस्ट्रेटिव लॉगिन का उपयोग ना करे। इस स्थिति में अगर आप के कम्प्युटर में कोई वायरस आ गया तो आप के कम्प्युटर का फुल एक्सेस का पावर मिल जायेगा और वो जो चाहे कर सकता है।
  •         अपने कम्प्युटर से गैर जरूरी प्रोग्राम और सर्विस को हटा दे।
  •         रिमोट एक्सेस हमेशा बंद रखें।
  •         कम्प्युटर में लगे पेन ड्राईव या पाकेट ड्राईव को डबल क्लिक करके ना खोले।
  •         सबसे जरूरी है कम्प्युटर के खतरो को जाने और सतर्क रहे।

Posted 24th August 2014 by Brijesh Sharma

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