मजदूरों को अपंग बनाने वाले ऑटोलाइन कारखाने का किया घेराव

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रुद्रपुर।देवभूमि खबर।पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ ने कहा कि मजदूरों को विकलांग बनाने वाली कंपनी ऑटोलाइन के खिलाफ जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिला प्रशासन एवं श्रम विभाग के अफसरों की अनदेखी के कारण कंपनी में लगातार श्रमिकों का शोषण हो रहा है। कहा कि श्रमिकों का शोषण किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्री बेहड़ सिडकुल के सेक्टर 11 में आटो लाइन कंपनी के गेट पर श्रमिक आंदोलन को संबोधित कर रहे थे।
दस दिन से कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कलक्ट्रेट में धरना दे श्रमिकों ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता सुशील गाबा की अगुवाई में सिडकुल तक जुलूस निकाला। उन्होंने ऑटोलाइन फैक्ट्री गेट को घेरकर प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री श्री बेहड़ ने श्रमिकों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि प्रदेश में मजदूरों का शोषण हो रहा है, लेकिन शासन प्रशासन के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि फैक्ट्री में अनेक मजदूर विकलांग हो चुके हैं, यह हैरत की बात है। फैक्ट्री प्रबंधन हादसों से सबक नहीं लेता। अपंग श्रमिकों का न तो उपचार कराया जाता है और न ही उन्हें मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि श्रम विभाग के अफसर क्या कर रहे हैं। कैसे गैरप्रशिक्षित श्रमिकों को मशीनों पर लगा दिया जाता है? है कोई देखने वाला। कंपनी मजदूरों की लाचारी का लाभ उठा रही है, जिसे सहन नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस नेता सुशील गाबा ने कहा कि आटो लाइन इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी के प्रबंधकों ने श्रम विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके गलत आधार पर यूनियन का पंजीकरण निरस्त कराया है। यूनियन का पंजीकरण निरस्त होने के बाद श्रमिकों का शोषण शुरू कर दिया गया है। आटो लाइन प्रबंधन ने 14 श्रमिकों को आरोप पत्र थमा दिया है तथा यूनियन के महामंत्री रोहित मेलकानी को निलंबित कर दिया है। कहा कि कंपनी में लगातार श्रमिकों को अपंग बनाया जा रहा है। श्रमिक नेता रोहित मेलकानी ने आरोप लगाया कि कंपनी के एक श्रमिक सुनील पर घर लौटते वक्त अज्ञात लोगों से हमला कराया गया। कहा कि ठेका मजदूरों से खतरनाक मशीनों पर गैरकानूनी ढंग से कार्य लिया जा रहा है, जिससे कंपनी परिसर में कभी भी कोई हादसा हो सकता है। कहा कि पूर्व में भी कई श्रमिकों के अंग भंग हो चुके हैं, लेकिन कंपनी की ओर से घायल श्रमिकों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। कंपनी के पास घायल श्रमिकों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं है। आरोप लगाया कि अधिक मुनाफे के लालच में कंपनी प्रबंधन श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। उनकी मांग है कि मजदूरों को विकलांग बनाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। विकलांग हुए श्रमिकों को उचित मुआवजा एवं स्थाई नौकरी दी जाए। मशीनों पर कार्यरत श्रमिकों को स्थायी किया जाए। महामंत्री रोहित का गैरकानूनी ढंग से किए गए निलंबन को वापस लिया जाए। श्रमिकों का उत्पीडन बंद किया जाए। ठेका मजदूरों को सात तारीख तक वेतन भुगतान की व्यवस्था कराई जाए। वेतन समझौता लागू किया जाए।
धरने पर बैठने वालों में महामंत्री रोहित मेलकानी, उलसिंह बिष्ट, दुर्गेश तिवारी, भुवन चंद्र, जीवन शर्मा, मंजू देवी, अंजू तिवारी, मुन्नी देवी, ज्योति कुमारी, दीपा मेहरा, सुमित, दिनेश, मन्नू, मुकेश मोर्या, इंक्लाबी मजदूर केंद्र के दिनेश, ब्रिटानिया संघ के लक्ष्मण सिंह, हर सिंह बिष्ट, महिंद्रा से हेमचंद्र, नवनीत कुमार, दिनेश तिवारी, गणेश, ऋषिपाल सिंह, राजकुमार परगांई, अरविंद, सोहन लाल आदि शामिल थे। इस दौरान वहां सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस फोर्स तैनात रहा।

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