फोटो-18 ए-‘अडवान्स हार्ट फेलियर क्लिनिक’ के बारे में जानकारी देेते मैक्स के विशेषज्ञ चिकित्सक।
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मैक्स अस्पताल में लाॅन्च किया गया ‘अडवान्स हार्ट फेलियर क्लिनिक’
देहरादून।देवभूमि खबर।मैक्स सुपर स्पेशलटी अस्पताल देहरादून ने अडवान्स्ड हार्ट फेलियर क्लिनिक लाॅन्च किया। यह क्लिनिक कन्जेस्टिव हार्ट फेलियर के बढ़ते मामलों का आधुनिक इलाज उपलब्ध कराएगा। दिल की सभी क्रोनिक बीमारियों के लिए आधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण के साथ मैक्स हेल्थकेयर ने यह अनूठी पहल की है।
लांचिंग के मौके पर डाॅ के.के. तलवार चेयरमैन कार्डियोलोजी मैक्स हेल्थकेयर, डाॅ केवल कृष्ण, डायरेक्टर- हार्ट ट्रांसप्लान्ट एवं वेंट्रीक्यूलर असिस्ट डिवाइसेज़, प्रिंसिपल कन्सलटेन्ट- सीटीवीएस, मैक्स सुपर स्पेशलटी अस्पताल, साकेत; डाॅ. प्रीती शर्मा, प्रिंसिपल कन्सलटेन्ट, डिपार्टमेन्ट आॅफ कार्डियोलोजी; डाॅ पुनीश सडाना, सीनियर कन्सलटेन्ट, डिपार्टमेन्ट आॅफ कार्डियोलोेजी, डाॅ इरफान याकूब भट, कन्सलटेन्ट, डिपार्टमेन्ट आॅफ कार्डियोलोजी; डाॅ. संदीप सिंह तंवर, वाईस प्रेज़ीडेन्ट- आॅपरेशन्स एवं यूनिट हैड उपस्थित रहे। सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में डाॅ. प्रीति शर्मा प्रिंसिपल कन्सलटेन्ट, डिपार्टमेन्ट आॅफ कार्डियोलोजी ने हार्ट फेलियर के बारे में बताते हुए कहा कि ‘‘अडवान्स हार्ट फेलियर ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज़ का दिल इतना कमज़ोर हो जाता है कि यह खून को ठीक से पम्प नहीं कर पाता, जिससे शरीर के अंगों तक आॅक्सीजन नहीं पहंुच पाती। एक स्थिति ऐसी आती है जब यह न तो डोनर के लिए और न ही आर्टीफिशियल दिल के लिए इंतज़ार कर सकता है। अंतिम अवस्था के हार्ट फेलियर के मामले में हार्ट ट्रांसप्लान्ट ही एकमात्र विकल्प रह जाता है। डाॅ. केवल कृष्ण, डायरेक्टर- हार्ट ट्रांसप्लान्ट एवं वेंट्रीकुलर असिस्ट डिवाइसेज़, प्रिंसिपल कन्सलटेन्ट- सीटीवीएस ने कहा, ‘‘अंतिम अवस्था के हार्ट फेलियर में मरीज़ का दिल इतना कमज़ोर हो जाता है कि यह खून को ठीक से पम्प नहीं कर पाता, ऐसे मामलों में टोटल हार्ट ट्रांसप्लान्ट के द्वारा ही मरीज़ को बचाया जा सकता है। इसमें मरीज़ के दिल को आर्टीफिशियल हार्ट से बदल दिया जाता है और हार्ट के एक चैम्बर में एलवीएडी रखा जाता है, ताकि दिल आॅक्सीजन से युक्त खून को शरीर में पम्प कर सके।’’ डाॅ पुनीश सडाना ने कहा, ‘‘अडवान्स्ड हार्ट फेलियर के ऐसे मामलों में जहां हार्ट ट्रांसप्लान्ट की कोई उम्मीद नहीं रहती, एलवीएडी के द्वारा मरीज़ का जीवन बढ़ाया जा सकता है। ऐसे मामले और भी मुश्किल होते हैं, जिनमें मरीज़ की उम्र या जीवनशैली के कारण ट्रांसप्लान्ट करना संभव नहीं होता।’’ डाॅ इरफान याकूब भट, कन्सलटेन्ट, डिपार्टमेन्ट आॅफ कार्डियोलोजी ने कहा, ‘‘भारत में हर साल 10 लाख लोग अंतिम अवस्था के आॅर्गन फेलियर का शिकार होते हैं, इनमें से सिर्फ 3500 मरीज़ों में ही आॅर्गनट्रांसप्लान्ट संभव हो पाता है। डाॅ के. क.े तलवार, चेयरमैन कार्डियोलोजी, मैक्स हेल्थकेयर ने बताया। डाॅ. संदीप सिंह तंवर ने कहा, ‘‘हार्ट फेलियर एक क्रोनिक स्थिति है, लेकिन कभी कभी यह अचानक हो जाती है। आजकल ज़्यादातर युवा बहुत ज़्यदा तनाव के साथ काम करते हैं, इनमें से ज़्यादातर लोगों के खाने पीने की आदतें अच्छी नहीं होतीं, वे नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते। इसके अलावा शराब और धूम्रपान स्थिति को और भी बदतर बना देते हैं। इस तरह की जीवनशैली के परिणाम उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह और कोरोनरी हार्ट डिज़ीज़ के रूप में सामने आते हैं, जो दिल की बीमारियों के मुख्य कारण हैं।’’

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