उत्तराखंड कांग्रेस ने धामी सरकार के निर्णय पर जताई नाराज़गी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने की छूट को बताया आत्मघाती कदम

उत्तराखंड कांग्रेस ने धामी सरकार के निर्णय पर जताई नाराज़गी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने की छूट को बताया आत्मघाती कदम
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देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों और शाखाओं में भाग लेने की अनुमति दिए जाने के बाद कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दसौनी ने इसे धामी सरकार का आत्मघाती कदम करार दिया है और कहा कि यह निर्णय सरकार के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अविश्वास को दर्शाता है।

गरिमा दसौनी ने धामी सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि भाजपा का संविधान में कोई विश्वास नहीं है। संविधान ने कार्यपालिका, विधायिका, और न्यायपालिका के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। ऐसे में सरकार द्वारा इस तरह का शासनादेश जारी करना, जो सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस जैसे संगठन के कार्यक्रमों में शामिल होने की छूट देता है, लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कितना सामाजिक संगठन है और कितना राजनीतिक, यह एक अलग बहस का विषय है। लेकिन यह सर्वविदित है कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को सेवा नियमावली के तहत किसी भी राजनीतिक दल या उसकी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं है। ऐसे में इस शासनादेश ने सेवा नियमावली की अवहेलना कर दी है।

गरिमा मेहरा दसौनी ने चिंता जताई कि इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के अनुशासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, “धामी सरकार ने कर्मचारियों को सेवा नियमावली के बंधन से तो आजाद कर दिया, लेकिन यह कदम अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के समान है।” अब, अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित मिलेगा, तो उसके पास यह बहाना होगा कि वह आरएसएस के किसी कार्यक्रम या शाखा में भाग लेने गया था। इससे प्रशासनिक ढांचे पर असर पड़ सकता है और कर्मचारियों पर नियंत्रण कम हो सकता है।

दसौनी ने आरोप लगाया कि भाजपा इस फैसले के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। उन्होंने कहा कि देशभर में भाजपा की लोकप्रियता में गिरावट आ रही है और जनता का मोहभंग हो रहा है। ऐसे में भाजपा अब सरकारी कर्मचारियों को अपना नया वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली में अपने नेताओं को खुश करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी कुर्सी खिसकती हुई नजर आ रही है।

दसौनी ने कहा कि यह शासनादेश ऐसे समय पर जारी किया गया है जब उत्तराखंड कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। राज्य में प्राकृतिक आपदाओं का कहर जारी है, अपराधों की बाढ़ आई हुई है, और कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। इस पर ध्यान देने की बजाय सरकार कर्मचारियों को संघ के कार्यक्रमों में भेजने के फैसले पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

उन्होंने कहा, “प्रदेश की भाजपा सरकार की प्राथमिकताएं इस निर्णय से स्पष्ट हो जाती हैं। यह आदेश जनहित और प्रदेश हित में नहीं है, बल्कि यह अराजकता को जन्म देगा और कार्यपालिका को नियंत्रित करना किसी के भी बूते से बाहर हो जाएगा।”

गरिमा दसौनी ने भाजपा पर धर्म और सेना की आड़ में राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि अब भाजपा सरकारी कर्मचारियों को भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का शिकार बना रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के शासनादेश भविष्य में प्रतिगामी परिणाम देंगे और राज्य में प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करेंगे।

कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यह आदेश प्रदेश के लिए हानिकारक साबित होगा और इसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।

देवभूमि खबर

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