पैराडाइज पेपर्स मामले में मोदी के दोनों मंत्रियों ने दी सफाई

Spread the love

नई दिल्ली। पैराडाइज पेपर्स मामले में पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के पुत्र व केंद्रीय विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा का नाम आने से मोदी सरकार व भाजपा के लिए परेशानियां काफी बढ़ गई हैं। जयंत सिन्हा के साथ ही भाजपा सांसद आरके सिन्हा का नाम भी इस लिस्ट में बताया जा रहा है।
सफाई देते हुए मोदी सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा है कि उन्होंने किसी निजी उद्देश्य के तहत कोई लेनदेन नहीं किया है सभी लेनदेन वैध और प्रमाणित हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद उन्होंने डी लाइट डिजाइन नाम की कंपनी से इस्तीफा दे दिया था और कंपनी से सभी तरह के संबंध तोड़ दिया था।
तो वहीं भाजपा सांसद आरके सिन्हा ने अपने ही तरीके से इस मामले पर सफाई पेश की है। उन्होंने सात दिनों का मौन व्रत रख रखा है। उन्होंने एक कागज पर लिखकर बताया कि उन्होंने भगवत यज्ञ को लेकर मौन व्रत रखा हुआ है।
यंत सिन्हा ने सफाई दी है कि जब वो राजनीतिक जीवन में आए, तब वो ओमेडियार के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके थे। लेकिन, इस तथ्य पर जयंत सिन्हा के पास कोई जवाब नहीं है कि जब उन्होंने चुनाव लड़ा तो उन्होंने ओमेडियार के डायरेक्टर पद पर रहने की बात क्यों नहीं बताई।
इतना ही नहीं जब सिन्हा केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए तब भी उन्होंने लोकसभा सचिवालय या पीएमओ को ये बात नहीं बताई। ये तथ्य जयंत सिन्हा के खिलाफ जा सकता है और मोदी सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट यानी (ICIJ) के जरिये किए गए इस खुलासे को पैराडाइज पेपर्स का नाम दिया गया है। इससे संबंधित एक करोड़ से ज्यादा डॉक्यूमेंट्स जर्मनी के अखबार सूडेयूटस्चे जीतियांग के पास मौजूद हैं। उन्होंने दुनियाभर के 96 मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर इन दस्तावेजों की जांच की है।
करोड़ों की संख्या में मौजूद इन दस्तावेजों की जांच से पता चला है कि 180 देशों के सबसे ज्यादा लोगों ने काला धन देश से बाहर निकालने के लिए विदेशी कंपनियों का सहारा लिया है। उनमें भारत का स्थान 19वां है। इस सूची में मान्यता दत्त जैसे कई बॉलीवुड स्टार का नाम शामिल हैं। जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, 714 भारतीयों ने इनमें पैसा लगाया है।
मोदी सरकार में केंद्रीय विमानन मंत्री जयंत सिन्हा का नाम पैराडाइज पेपर्स लीक में सामने आने के बाद से इस मसले पर भाजपा खामोश है। दस्तावेजों के अनुसार, जयंत सिन्हा मंत्री बनने से पहले ओमेडियार नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर थे और इसी ओमेडियार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी लाइट डिजाइन में एक बहुत बड़ा निवेश किया था।
इसमें खास बात यह है कि डी लाइट डिजाइन ने टेक्स हेवेन केमैन आइलैंड में अपनी एक सब्सिडियरी कंपनी बनाई थी। जाहिर तौर पर ये सब कुछ टैक्स और काली कमाई बचाने के लिए की गई कवायद थी।
टेक्स हैवेन देशों में निवेश की पोल खोलने वाली लीगल फर्म ऐपलबी के मुताबिक, डी लाइड डिजाइन ने केमैन आइलैंड स्थित सब्सिडियरी कंपनी से 30 लाख अमेरिकी डॉलर का कर्ज लिया था। कर्ज 2012 में लिया गया और उस वक्त जयंत सिन्हा ओमेडियार के डायरेक्टर के पद पर नियुक्त थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Next Post

गोवंश संरक्षण की दिशा में योगी सरकार क विस्तृत प्लान तैयार

Spread the loveउत्तर प्रदेश में छुट्टा जानवरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए और गोवंश संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव के लिए योगी सरकार ने एक विस्तृत प्लान तैयार किया है. इसके अनुसार प्रदेश के गांव-गांव में गौशाला खोलने की तैयारी है. प्रदेश के तमाम गांव के प्रधानों […]

You May Like