किन्नर क्यों नहीं कर सकते केबिन क्रू का काम:सुप्रीम कोर्ट

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वाई जहाज में केबिन क्रू का काम करने के सपने को लेकर एक किन्नर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. एक किन्नर ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि एयर इंडिया उसके साथ इसलिए भेदभाव कर रहा है क्योंकि वो किन्नर है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एयर इंडिया को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्या किन्नरों को हवाई जहाज में केबिन क्रू का काम करने का आधिकार नहीं है. सरकार को चार हफ्तों में जवाब देना होगा.
केबिन क्रू के लिए सिर्फ मर्द या औरत का चयन किया जाता है. इसमें किन्नरों के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है. केबिन क्रू का काम होता है कि यात्रा के दौरान यात्रियों को जरूरी चीज मुहैया कराए और फ्लाइट में पायलट की मदद करे.
शानवी पोन्नूस्वामी एक किन्नर हैं जो अब अपना सेक्स बदल कर महिला बन गई हैं. शानवी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और उन्होंने एयर इंडिया के कस्टमर केयर में नौकरी भी की है. वो अब केबिन क्रू में भी काम करना चाहती हैं.
उनका आरोप है कि उन्होंने इस नौकरी को पाने के लिए कई बार परीक्षा दी और अच्छे नंबर से पास हुईं. इसके बावजूद उनका चयन नहीं हुआ. उन्हें बताया गया की किन्नरों को ये नौकरी नहीं दी जा सकती.
उन्होंने इसकी शिकायत नागरिक उड्डयन मंत्रालय और प्रधानमंत्री के पास भी भेजी लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया. इसके बाद शानवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.
शानवी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ही एक फैसले का हवाला दिया है जिसमें कोर्ट ने किन्नरों को मर्द या औरत के बराबर का दर्जा दिया है. कोर्ट ने किन्नरों के मुद्दे को मानव अधिकार का मामला बताया है. अब देखना है कि सरकार इस पर क्या जवाब देती है.

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