देहरादून।दून विवि में प्री-वेडिंग काउंसलिंग विषय पर एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें एनसीसी, एनएसएस और मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को वैवाहिक जीवन से पूर्व मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक तैयारी के महत्व से अवगत कराना था, ताकि वे भविष्य में स्वस्थ और संतुलित संबंध स्थापित कर सकें।
इस अवसर पर डीन छात्र कल्याण प्रोफेसर एच. सी. पुरोहित, सोशल साइंस के डीन प्रोफेसर आर. पी. ममगई, प्रोफेसर हर्ष डोभाल, देवभूमि विकास संस्थान की मुख्य ट्रस्टी कृति रावत और डॉ. शिवानी गेरोला सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दून विवि के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. राजेश भट्ट ने कहा कि खुशहाल और संतुलित जीवन के लिए रिश्तों की मनोवैज्ञानिक समझ विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह साइकोलॉजिकल ट्रॉमा कई बार बाल्यकाल से ही शुरू हो जाते है, बड़े होने पर युवा नकारात्मक भावनाओं के कारण या मूल को समझ नहीं पाते है क्योंकि वो मनोवैज्ञानिक सहायता या काउंसलिंग नहीं ले पाते है। डॉ. भट्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विवाह से पहले परामर्श लिया जाए तो कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं, संचार की कमी, अपेक्षाओं के टकराव और तनाव जैसी स्थितियों को समय रहते समझा और संभाला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि देवभूमि विकास संस्थान के संरक्षक एवं लोकसभा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के मार्गदर्शन में संस्थान मनोवैज्ञानिकों और परामर्शदाताओं के सहयोग से युवाओं को सही दिशा देने का कार्य कर रहा है। उनका कहना था कि समाज में ऐसे कई युवा हैं जो मानसिक रूप से अकेलापन महसूस करते हैं, और उन्हें सहारा देने में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
डीन छात्र कल्याण प्रोफेसर एच. सी. पुरोहित ने कहा कि दून विवि का मनोविज्ञान विभाग युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि देवभूमि विकास संस्थान के साथ मिलकर विश्वविद्यालय परिसर के बाहर भी समाज में युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
सोशल साइंस स्कूल के डीन प्रोफेसर आर. पी. ममगई ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज के समाज में एकाकीपन, तनाव और तलाक के मामलों में वृद्धि एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। इस समस्या का समाधान युवाओं की जागरूकता, समझ और सक्रिय सहभागिता से ही संभव है।
डॉ. आंबेडकर चेयर प्रोफेसर हर्ष डोभाल ने कहा कि आधुनिकता और पश्चिमी प्रभाव के बीच युवा अपने सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक ढांचे को समझने में पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था अपने आप में समृद्ध और संतुलित है, लेकिन आज परिवार में रहते हुए भी लोग अकेलापन महसूस कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि युवा आधुनिक परिवेश में रहते हुए भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें।
देवभूमि विकास संस्थान की मुख्य ट्रस्टी कृति रावत ने संस्थान की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान युवाओं के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस पहल से जुड़ने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिवानी गेरोला ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला न केवल प्री-वेडिंग काउंसलिंग के महत्व को रेखांकित करने में सफल रही, बल्कि युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, संबंधों की समझ और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति सजग करने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुई।
