आज के वैश्विक आर्थिक संकट में डॉ अंबेडकर के आर्थिक विचार और भी प्रासंगिक: राजेश महापात्र
देहरादून।दून विश्वविद्यालय के डॉ. अंबेडकर चेयर द्वारा “डॉ बी.आर. अंबेडकर फ्राइडे सीरीज़: डायलॉग्स ऑन इक्वालिटी” का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर आयोजित उद्घाटन व्याख्यान में प्रख्यात पत्रकार और आर्थिक टिप्पणीकार श्री राजेश महापात्र ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में डॉ. भीमराव अंबेडकर के आर्थिक विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।
व्याख्यान का विषय “वर्तमान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और डॉ. अंबेडकर के आर्थिक विचारों की प्रासंगिकता” था। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि डॉ. अंबेडकर केवल सामाजिक सुधारक ही नहीं, बल्कि एक गहन अर्थशास्त्री भी थे, जिनके विचार आज की आर्थिक अस्थिरता को समझने और समाधान खोजने में मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं।
राजेश महापात्र ने कहा कि आज दुनिया अस्थिर बाजारों, बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में डॉ. अंबेडकर की आर्थिक सोच, जिसमें मौद्रिक स्थिरता, राज्य समाजवाद और श्रमिक कल्याण जैसे सिद्धांत शामिल हैं, आर्थिक लचीलापन और समावेशी विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
समाज विज्ञान संकाय के डीन प्रो. आर.पी. ममगाईं ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात, नई तकनीकों और उनसे पैदा हो रही असमानताओं के बीच डॉ. अंबेडकर के विचार सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सार्वजनिक संस्थानों और प्रभावी नीतियों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया।
पूर्व पीटीआई संपादक और हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व कार्यकारी संपादक रहे राजेश महापात्र ने कहा कि आम तौर पर लोग डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता और सामाजिक सुधारक के रूप में जानते हैं, लेकिन वे प्रशिक्षित अर्थशास्त्री भी थे।
उन्होंने बताया कि लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मुद्रा प्रबंधन और औपनिवेशिक भारत की प्रांतीय वित्त व्यवस्था पर किया गया उनका शोध आज भी नीति-निर्माण में उपयोगी है। महापात्र के अनुसार, कीमतों की स्थिरता और महंगाई नियंत्रण को केंद्रीय बैंक का प्रमुख लक्ष्य मानने का अंबेडकर का दृष्टिकोण वर्तमान भारतीय परिप्रेक्ष्य में भी पूरी तरह प्रासंगिक है। साथ ही उन्होंने राज्यों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के आर्थिक विचार अपने समय से आगे थे और सामाजिक न्याय, समान विकास तथा लोकतांत्रिक शासन की उनकी अवधारणा आज वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक विषमता के दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
डॉ. अंबेडकर चेयर के प्रोफेसर हर्ष डोभाल ने बताया कि यह व्याख्यान श्रृंखला समकालीन मुद्दों पर सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से चर्चा का एक स्थायी मंच बनेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में दून विश्वविद्यालय विभिन्न क्षेत्रों के विचारकों और विशेषज्ञों को आमंत्रित कर इस संवाद को आगे बढ़ाएगा।
इस अवसर पर प्रो. एच.सी. पुरोहित, प्रो. राजेश कुमार, डॉ. अंकित नागर, डॉ. सौम्यता, डॉ. मानवेंद्र, डॉ. आशुतोष, सुश्री दिव्यांजलि, डॉ. राहुल, डॉ. रवि सहित कई शिक्षाविद और छात्र उपस्थित रहे।

