रीमागाड़ा भगवती मंदिर में छह दिवसीय महिला होली की धूम, क्षेत्र में उत्साह का माहौल

रीमागाड़ा भगवती मंदिर में छह दिवसीय महिला होली की धूम, क्षेत्र में उत्साह का माहौल
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अल्मोड़ा। रीठागाड़ क्षेत्र के रीमागाड़ा स्थित रीमागाड़ा भगवती मंदिर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी छह दिवसीय महिला होली महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। पर्वतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता यह आयोजन पिछले कई दशकों से क्षेत्र की पहचान बना हुआ है।

महिलाएं दिन में मां भगवती मंदिर के प्रांगण में छह दिनों तक पारंपरिक होली गायन करती हैं। वहीं रात्रि के समय अलग-अलग गांवों में महिला रात्रि होली का आयोजन किया जाता है, जिसमें लोकगीत, झोड़ा-चाचरी और खड़ी होली की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाती हैं।

महिला संगठन द्वारा चीर बंधन से लेकर छैरणी तक दिन में मंदिर परिसर में तथा रात्रि में विभिन्न गांवों में होली कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह परंपरा पिछले लगभग 35 वर्षों से निरंतर चली आ रही है।

महिला होली कमेटी में प्रत्येक महिला अपनी श्रद्धानुसार अंशदान करती है। छैरणी के अगले दिन एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें रिश्तेदारों और आसपास के ग्रामीणों को आमंत्रित किया जाता है। पंडित जी द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना के उपरांत भंडारा संपन्न होता है।

समिति द्वारा पिछले 40 वर्षों से गवरा देवी सातों-आठों का मेला तथा 35 वर्षों से होली महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। क्षेत्र में पलायन के कारण कई लोग इन पर्वों में शामिल नहीं हो पाते, लेकिन स्थानीय महिलाएं अपनी परंपराओं को सहेजते हुए उत्सव को जीवंत बनाए रखे हुए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप सिंह नेगी, रीठागाड़ी दगड़ियो संघर्ष समिति से जुड़े, ने बताया कि वे पिछले 35 वर्षों से इस आयोजन में सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मातृशक्ति ने अपनी परंपरा और संस्कृति को सशक्त रूप से जीवित रखा है।
नेगी ने यह भी कहा कि चाहे कोई धार्मिक या सांस्कृतिक अनुष्ठान हो अथवा सुख-दुख के अवसर, महिलाएं हमेशा आगे बढ़कर समाज को संगठित और मजबूत बनाने का कार्य करती हैं।

देवभूमि खबर

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