धामी मंत्रिमंडल में पूर्व कांग्रेसी विधायकों को तरजीह, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी पर सवाल
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाले 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद राजनीतिक संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है। आरोप है कि मंत्रिमंडल में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए विधायकों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि पार्टी के कई वरिष्ठ और पुराने नेताओं को जगह नहीं मिल पाई।
हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल कुछ मंत्री पूर्व में कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, जिन्हें अब महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इस घटनाक्रम को लेकर भाजपा के भीतर भी हलचल की चर्चा है, जहां लंबे समय से संगठन से जुड़े वरिष्ठ विधायकों की उपेक्षा के आरोप सामने आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, इससे पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और इसे अवसरवादी राजनीति करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा अब उन्हीं नेताओं पर निर्भर हो रही है, जिन्हें वह पहले निशाने पर रखती थी।
मंत्रिमंडल के इस स्वरूप ने न केवल सत्तारूढ़ दल के भीतर बल्कि प्रदेश की समग्र राजनीति में भी नई चर्चा को जन्म दे दिया है।

