आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन तेज, विभागीय कार्रवाई के निर्देशों पर संगठन ने जताई कड़ी आपत्ति

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देहरादून। उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन ने विभाग द्वारा धरना-प्रदर्शन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने इसे “धमकी भरा कदम” बताते हुए विरोध जताया है।

संगठन की प्रदेश अध्यक्षा रेखा नेगी ने निदेशक, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग को भेजे पत्र में कहा कि 14 मार्च 2026 को आयोजित प्रदेश स्तरीय रैली के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ प्रशासन का व्यवहार अत्यंत आपत्तिजनक रहा, जिससे कार्यकर्ताओं में व्यापक रोष है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि जून 2025 के शासनादेश के हवाले से कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जबकि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। संगठन का आरोप है कि विभागीय स्तर पर समस्याओं को सुनने के बजाय दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल उपस्थिति दर्ज करा रही हैं और पोषण ट्रैकर सहित अन्य कार्यों का बहिष्कार कर रही हैं। साथ ही, उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक मानदेय में वृद्धि नहीं की जाती, तब तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लगे रहेंगे और बीएलओ कार्य भी नहीं किया जाएगा।

पत्र में कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मुद्दे उठाते हुए कहा कि मोबाइल रिचार्ज, ईंधन, यात्रा भत्ता, पोषण संबंधी गतिविधियों और अन्य कार्यों के लिए उन्हें पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल रही है। सीमित मानदेय में कार्य करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है, जबकि अधिकांश कार्यकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा जिला स्तर पर समस्या समाधान बैठकों के दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी बैठकें नियमित रूप से आयोजित नहीं हुईं।
अंत में संगठन ने विभाग से मांग की है कि धमकी भरे पत्र जारी करने के बजाय संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान किया जाए। संगठन ने दोहराया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

देवभूमि खबर

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