इन्वेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी, गिरोह का सदस्य गाजियाबाद से गिरफ्तार
देहरादून। उत्तराखण्ड एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस ने इन्वेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ श्री अजय सिंह ने बताया कि पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर निवासी एक व्यक्ति द्वारा साइबर ठगी की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता को अक्टूबर से दिसम्बर 2025 के बीच “71 Wealth Enhancement” नामक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर प्रतिदिन 5 प्रतिशत से अधिक मुनाफा देने का झांसा दिया गया। इसके बाद लिंक के माध्यम से Internal Equity Account में रजिस्ट्रेशन कराकर विभिन्न बैंक खातों और UPI के जरिए कुल ₹1,31,76,000/- की ठगी की गई।
मामले में साइबर क्राइम थाना देहरादून में मु0अ0सं0 62/2025 के तहत धारा 318(4), 61(2) बीएनएस एवं 66D आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ की टीम ने तकनीकी जांच और डाटा विश्लेषण के आधार पर आरोपी की पहचान अरवाज सैफी (31 वर्ष) निवासी दिलशाद गार्डन, गाजियाबाद के रूप में की।
साइबर टीम ने आरोपी को गाजियाबाद के दिलशाद गार्डन क्षेत्र से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी इन्वेस्टमेंट ग्रुप बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाता था। आरोपी के खाते में इस मामले से संबंधित करीब 10 लाख रुपये जमा पाए गए, जबकि मात्र दो माह में उसके बैंक खाते में करीब 2 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक वीवो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराध में किया जा रहा था। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी के बैंक खातों के खिलाफ उत्तराखण्ड सहित देश के 9 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार के फर्जी इन्वेस्टमेंट, डिजिटल अरेस्ट या ज्यादा मुनाफा देने वाले लालच में न आएं। कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस या गिरफ्तारी की सूचना नहीं देती। ऐसे मामलों में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
उन्होंने बताया कि साइबर धोखाधड़ी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन नंबर या www.cybercrime.gov.in� पोर्टल पर भी दर्ज कराई जा सकती है। साथ ही संचार साथी पोर्टल के “चाक्षु” प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी जा सकती है।
गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक अनिल कुमार, उपनिरीक्षक दिनेश पंवार और कांस्टेबल सोहन बडोनी शामिल रहे, जबकि तकनीकी सहयोग अपर उपनिरीक्षक पवन यादव द्वारा प्रदान किया गया।

