मानवीय मूल्यों की शिक्षा प्रारम्भिक कक्षाओं से ही दिये जाने की आवश्यकता है :सीमा जौनसारी

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देहरादून।देवभूमि खबर। शिक्षा में यह अनुभव किया जा रहा है कि हम कार्य हेतु शिक्षा पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, परन्तु जीवन की शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इसके फलस्वरुप शिक्षा में मानव मूल्यों में कमी दृष्टिगोचर हो रही है। इसलिए बच्चों में शाला त्याग की प्रवृत्ति पाई जा रही है तथा वे अन्य कुप्रवृत्तियों की ओर भी अग्रसर हो रहे है। ऐसी स्थिति में शिक्षा की प्रक्रिया में ऐसे तत्व समाहित किये जाने की आवश्यकता है, ताकि उनमें मानवीय मूल्यों का सहज विकास सम्भव हो सके और भविष्य में वे अच्छे नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने अवगत कराया है कि मानवीय मूल्यों की शिक्षा प्रारम्भिक कक्षाओं से ही दिये जाने की आवश्यकता है। आनन्दम पाठ्यचर्या के अन्तर्गत कक्षा 01 से कक्षा 08 तक के बच्चों को ध्यान देना, गतिविधियां, कहानियां एवं अभिव्यक्ति के माध्यम से मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी जाती है। बच्चों की एकाग्रता में वृद्धि होगी इसका सकारात्मक प्रभाव गणित एवं विज्ञान जैसे विषयों को समझने में परिलक्षित होगा। गतिविधियों के माध्यम से बच्चे समूह में कार्य करना सीख पायेंगे। उद्देश्य पूर्ण कहानियों के माध्यम से वे जीवन मूल्यों को आत्मसात कर सकेंगे। अभिव्यक्ति के सत्रों के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जाता है। कार्यक्रम को प्रथम चरण के रुप में 15 पायलट ब्लॉक में प्रारम्भ किया गया है। इसके अन्तर्गत लगभग 3000 शिक्षकों का अभिमुखीकरण कार्य सम्पन्न हो चुका है। विद्यार्थियों के लिये पृथक से कोई पुस्तक नहीं है अपितु शिक्षकों के मार्गदर्शन हेतु शिक्षक संदर्शिकाएँ बनायी गयी हैं। यह शिक्षक संदर्शिकायें उत्तराखण्ड के शिक्षकों, एस0सी0ई0आर0टी0 एवं सीमैट के विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गयी हैं। शिक्षक संदर्शिका में दिये गये निर्देशों के आधार पर शिक्षकों द्वारा आनन्दम् पाठ्यचर्या का संचालन किया जायेगा। बाल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एवं शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डे ने आनंदम संदर्शिकाओं का विमोचन किया। यह कार्यक्रम कक्षा 01 से 08 तक के सभी शासकीय विद्यालयों में प्रारम्भ किया जा रहा है। निदेशालय स्तर से कार्यक्रम का सघन अनुश्रवण किया जायेगा। कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक विद्यालय के एक प्रधानाध्यापक या अध्यापक को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

देवभूमि खबर

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