कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर में मनौविज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण :प्रो0 सुरेखा डंगवाल

कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर में मनौविज्ञान की भूमिका महत्वपूर्ण :प्रो0 सुरेखा डंगवाल
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देहरादून। दून विश्वविद्यालय एवं एनसीसी के तत्वावधान में ‘‘महामारी का मनुष्य के मनोविज्ञान पर प्रभाव’’ पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 सुरेखा डंगवाल ने कहा कि कोविड की अदृश्य चुनौतियां का सामना करने के लिये व्यक्ति को मनौवैज्ञानिक रूप से सशक्त होना होगा क्योंकि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को आइसोलेशन या क्वारनटीन जैसे अनुशासन का पालन करना होता है और जिसका उनके मनोविज्ञान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है इसीलिये हम सबको समाज में एक-दूसरे को सामाजिक एवं मनौवैज्ञानिक रूप से मदद करनी चाहिये कयोेंकि अदृश्य चुनौतयों का जोखिम मनौवैज्ञानिक तौर पर मजबूती से ही सामना किया जा सकता है और कोरोना के बाद के मनौवैज्ञानिक प्रभाव को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
इस अवसर पर महात्मा गांधी नेशनल कांउसिल आॅफ रूरल एजुकेशन, भारत सरकार की किरन चदेंल ने कहा कि आज इस वैश्विक महामारी के दौर में बच्चांे एवं बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। कक्योंकि इन दोनों आयु वर्ग के लोगों को समाज एवं परिवार के सहारे की अधिक आवश्यकता है इसलिये हमारी जिम्मेदारी है कि हम वच्चें एवं बजुर्गों का विशेष खयाल रखें क्योंकि आज बच्चों के घूमने-फिरने, खेलकूद के सभी कार्यक्रम अव्यवस्थित हैं इसलिये उनको सामाजिक सहारे की अधिक आवश्यकता है।

इस अवसर पर कार्यक्रम की संयोजक लैफ्टिनेंट डाॅ0 स्मिता त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया और दून विश्वविद्यालय के एनसीसी केडेड्स द्वारा कियो जा रहे कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अतुल कुमार, सना, नेहा सहित कई विद्यार्थी शामिल रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डा0 सुधांशु जोशी ने किया।

देवभूमि खबर

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