अर्थव्यवस्था में उन्नति के लिए युवाओं की ऊर्जा का सही दिशा में निर्देशन वर्तमान समय की जरूरत: प्रो सुरेखा डंगवाल
देहरादून । दून विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के द्वारा एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया जिसका टॉपिक “भारत में युवा: रोजगार की चुनौतियां एवं रोजगार क्षमता” था.
दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि अर्थव्यवस्था में उन्नति के लिए युवाओं की ऊर्जा का सही दिशा में निर्देशन वर्तमान समय की जरूरत है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है जिसके द्वारा शोध को प्राथमिकता दी जाएगी एवं विद्यार्थी डिग्री लेने के साथ-साथ रोजगार से संबंधित कौशल का अर्जन भी करेंगे। नई शिक्षा नीति विदेश में अपनाई जा रहे मॉडल की तरह ही सार्थक एवं लाभकारी सिद्ध होगी। उच्च स्तर के शोध होने से नई टेक्नोलॉजी सामने आएगी और लोग नई टेक्नोलॉजी को सीखने के लिए प्रेरित होंगे जिससे सभी लोग, विशेषकर युवा आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी होंगे।
अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आरपी ममगई ने पैनल डिस्कशन में विषय की शुरुआत एवं स्वागत करते हुए के कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 33 करोड़ युवा थे। जो की पूरी जनसंख्या का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। ऐसा अनुमान है कि आने वाले समय में जिस हिसाब से लोगों के अंदर जनसंख्या नियंत्रित करने की भावना आई है जिसके कारण भविष्य में, युवाओं की संख्या कम हो सकती है। बढ़ती हुई जनसंख्या रोजगार की चुनौतियों को बढ़ाती है।
पूर्व डायरेक्टर जनरल डॉक्टर संजीव चोपड़ा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने कहा कि बंगाल और उत्तराखंड का मॉडल उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाले हैं। उत्तराखंड बनने के बाद उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया जिससे यहां पर उद्योगों के विकास को बल मिला। किसी भी कार्य को करने के लिए एटीट्यूड का होना बहुत आवश्यक है और साथ ही समय के साथ युवाओं के अंदर नए-नए कौशलों को विकसित करने की भी जरूरत है।
आईआईटी रुड़की के मानविकी और समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डीके नौरियाल ने अर्थव्यवस्था के ऊपर विस्तार से चर्चा की एवं सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योग को बेहतर तरीके से विकसित करने के लिए अपने सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है एवं नई टेक्नोलॉजी को कृषि से संबंधित कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए लोगों को जागरूक किए जाने की जरूरत है। वर्तमान परिदृश्य में किसी भी पुराने मॉडल की तुलना नई मॉडल से नहीं की जा सकती है क्योंकि जिस हिसाब से अर्थव्यवस्था परिवर्तित हो रही है नई मॉडल की जरूरत महसूस की जा रही है।
नाबार्ड के चीफ जनरल मैनेजर श्री एपी दास ने बताया कि ग्रामीण व शहरी अर्थव्यवस्था में जो अंतर है उसको कम किए जाने की आवश्यकता है यदि यह अंतर लगातार बना रहेगा तो शहरी क्षेत्रों में दबाव बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था उस हिसाब से प्रगति नहीं कर पाएगी जो अपेक्षित है। गांव और शहरों की शिक्षा में काफी अंतर है। शिक्षण और प्रशिक्षण को उन्नत करने की जरूरत है। यदि गांव और शहर की सुविधाओं में अंतर कम होगा तो अर्थव्यवस्था बेहतर तरीके से कार्य करेगी।
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एचसी पुरोहित ने पैनल डिस्कशन के दौरान कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की तरफ को बढ़ रहा है। कोरोना का हाल में संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था में नकारात्मकता आई थी लेकिन समय के साथ भारत में फिर से अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया है और कई क्षेत्रों में नए स्टार्टअप शुरू किए हैं जोकि भारत के युवाओं की कर्मठता और महत्वाकांक्षाओं का परिणाम है। पिछले कुछ समय में 50,000 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू किए गए हैं जिसमें से 72 यूनिकॉर्न है यानी कि जिनका कारोबार 100 करोड़ डॉलर से अधिक का है। सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में एजुकेशन टेक्नोलॉजी में भारत विश्व में तीसरे नंबर पर एवं फाइनेंस टेक्नोलॉजी में एशिया में प्रथम नंबर पर है। देश के अंदर उद्यमिता का वातावरण है और ब्यूरो किसी की जो पुरानी प्रवृत्ति लालफीताशाही की थी उसके बदले उद्यमियों के लिए रेड कारपेट बिछाया जा रहा है ताकि वह तेजी के साथ नई कंपनी को खोल सके और कार्य कर सकें।
धाद/उत्तरजन, देहरादून, के सचिव श्री लोकेश नवानी ने बताया कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के उन्नयन के लिए गांव का अध्ययन किए जाने की अति आवश्यकता है। इस प्रकार के अध्ययन में उन लोगों को भी सम्मिलित किया जाए जो अपने मूल गांव में पहुंचकर स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से संबल हो रहे हैं और गांव के अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। ऐसे लोगों का केस अध्ययन अन्य लोगों को प्रेरणा दे सकता है।
एमएसडब्ल्यू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष पति डोभाल ने पैनल डिस्कशन को कनक्लूड करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के विकास के लिए नई योजनाओं का क्रियान्वयन के करने की आवश्यकता है एवं रोजगार परक शिक्षा समय की मांग है। युवाओं को रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना अति आवश्यक है।
इस कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद प्रस्ताव डॉ मधु बिष्ट के द्वारा दिया गया एवं इस कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर डी0 डी0 चौनियाल, प्रो0 के0 डी0 पुरोहित, डॉ अरुण कुमार, डॉ सुधांशु जोशी, डॉक्टर सविता तिवारी कर्नाटक, कविता एवं जागृति जयसवाल और सभी विभागों से आए विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

