गैरसैंण के बजाय दून में बजट सत्र करवाना सरकार की पहाड़ परख सोच का दिवालियापन हैं,:उक्रांद

गैरसैंण के बजाय दून में बजट सत्र करवाना सरकार की पहाड़ परख सोच का दिवालियापन हैं,:उक्रांद
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देहरादून।उक्रांद ने राज्य सरकार के 7 अप्रैल के बजट सत्र को गैरसैण के बजाय 14 जून से देहरादून में करने पर सरकार की ईमानदारी पर सवालिया निशान उठाया। उन्होंने कहा कि ये सरकार की पहाड़ परख सोच का दिवालियापन हैं

उक्रांद ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बजट सत्र जो 7 अप्रैल 2022 से गैरसैण में होना था, जिसे अब सरकार 14 जून से देहरादून में होगा ।बजट सत्र का गैरसैण न होना सरकार की ईमानदारी पर सवालिया निशान उठता हैं।सरकार की पहाड़ परख सोच का दिवालियापन हैं।पिछली सरकार द्वारा गैरसैण को ग्रीष्मकालीन बनायीं थी।जो अब भाजपानित की ही सरकार अब गैरसैण का केवल नाम लेकर औपचारिकता कर रही हैं।जबकि उत्तराखंड क्रांति दल गैरसैण को स्थायी राजधानी को लेकर लगातार राज्य बनने के बाद मांग करती आयी हैं।सन 1992 में उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा गैरसैण को वीर चंद सिंह गढ़वाली के नाम चंद्रनगर गैरसैण रखा था ।गैरसैण में पेशावर काण्ड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की प्रतिमा लगाकर गैरसैण को राज्य की राजधानी माना, यही नहीं उत्तराखंड आंदोलन में गैरसैण राज्य का केंद्र बिंदु रहा औरगैरसैण राज्य आंदोलन की भावनाओं का केंद्र बना। वर्तमान सरकार की मंशा व इच्छाशक्ति स्थायी राजधानी बनाने की कही दिखायी नहीं देता।दल ने राज्य की लड़ाई लड़ी राज्य बना, अब गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने का संकल्प जो कि शहीदों का स्वप्ना व आंदोलनकरियों कि भावना हैं, उसे पूरा किया जायेगा।दल सरकार से इसी सत्र में गैरसैण को पूर्णकालीन राजधानी की मांग करता हैं।

देवभूमि खबर

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