जान जोखिम में डाल कर घर घर सेवा और कोरोना संक्रिमतों को ढो रही है दून पुलिस
देहरादून। पुलिस महकमे ने मिशन हौसला का नाम देकर भले अच्छा निर्णय लिया हो ।पुलिस कर्मचारियों द्वारा संक्रमितों और आम जनता का सहयोग करना सराहनीय है लेकिन कोरोना संक्रमितों को ढोकर ले जाना जान जोखिम में डाल सकता है।
दून पुलिस लगातार अपनी अच्छी कार्यशैली से आम जनता की पसंद बनती जा रही है।आम जनता का पुलिस की लगातार सक्रियता से बढ़कर कार्य करने से विश्वास भले बढ़ रहा हो।लेकिन दूसरी तरफ हॉस्पिटलों में कोरोना संक्रमितों की मृत्यु होने पर उनके परिजनों द्वारा लाश को छोड़ना पुलिस की गले की फांस बनती जा रही है।अपने मातहतों की आज्ञा मानने वाले पुलिस कर्मी जिस तन्मयता से कार्य कर रहे हैं तारीफे काबिल है ।मिशन हौसला आम जनता के लिए फायदेमंद हो सकता है लेकिन पुलिस पर लगातार बढ़ता कार्यभार पुलिस कर्मियों के हौसले को कमजोर करता नजर आ रहा है। ऐसे कई मामले नजर आ रहे हैं जंहा अस्पतालों में लाशों को तक ले जाने के लिए पुलिस को मसक्कत करनी पड़ रही है।पुलिस कर्मियों पर समाज सेवा के साथ कोरोना एसओपी का पालन करना मानसिक के साथ शरीरिक रूप से दवाब बनाता नजर आ रहा है।यस सर की नौकरी करने वाले पुलिस कर्मी सब बोझ को झेलते हुए अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आज कनिष्क अस्पताल में एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण से से मृत्यु हो चुके के परिजन मृतक के शव को अस्पताल में छोड़ कर चले गए जिसकी सूचना थाने को मिलने पर चौकी प्रभारी बाईपास मानवेंद्र सिंह मय चीता 36 कांस्टेबल 1506 गौरव कुमार व कॉन्स्टेबल अरविन्द भट्ट के कनिष्क अस्पताल पर पहुंचे उक्त शव को राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट आदेशों का पालन करते हुए पीपीई किट पहनकर मृतक के शव को अंतिम संस्कार हेतु रायपुर ले गए। वंही दूसरी और एक टीम द्वारा अभियान “मिशन हौसला” के अंतर्गत कोविड से पीड़ित दृस्टिहीन सीनियर सिटीजन को घर पर एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई ।
देखना होगा कि जान जोखिम में डालकर काम कर रही पुलिस कैसे अपने आपको सुरक्षित रख पाएगी।

