पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन उत्तराखंड के प्रांतीय अध्यक्ष श्री जीतमणि पैन्यूली एवं महामंत्री श्री मुकेश रतूड़ी की अगुवाई में टीम ने की विधायकों से मुलाकात
देहरादून।।पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन उत्तराखंड की टीम ने सत्र मे पुरानी पेंशन बहाली की मांग प्रमुखता से उठाए जाने हेतु विधायकों से मुलाकात की।
पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन उत्तराखंड के प्रांतीय अध्यक्ष श्री जीतमणि पैन्यूली एवं प्रांतीय महामंत्री श्री मुकेश रतूड़ी की अगुवाई में पुरानी पेंशन बहाली हेतु चल रहे उग्र आंदोलन के क्रम में आज विधानसभा सत्र शुरू होने से पूर्व उक्त सत्र मे पुरानी पेंशन बहाली की मांग प्रमुखता से उठाए जाने हेतु प्रांतीय एवं जनपदीय कार्यकारिणी की एक संयुक्त टीम सहित विधायक गणों से मुलाकात की।
प्रांतीय अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली ने बताया कि टीम ने विधायक रानीखेत,श्री करण सिंह महारा , विधायक किच्छा,श्री राजेश शुक्ला, विधायक झबरेड़ा, श्री देशराज कर्णवाल , विधायक लोहाघाट श्री पूर्ण सिंह फर्त्याल, विधायक यमुनोत्री श्री केदार सिंह रावत, विधायक ज्वालापुर श्री सुरेश राठौड़ एवं विधायक लैंसडौन श्री दिलीप सिंह रावत से पुरानी पेंशन बहाली के इस राष्ट्रव्यापी मुद्दे को विधानसभा सत्र उत्तराखंड में पुरजोर तरीके से उठाया जाने हेतु मांग की।उन्होंने बताया कि सभी विधायक गणों द्वारा सकारात्मक रवैया दिखाते हुए पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन को पूर्ण समर्थन एवं इस मुद्दे को विधानसभा सत्र में उठाए जाने हेतु सहमति प्रदान की गई। इस क्रम में श्री देशराज कंडवाल विधायक झबरेड़ा ने अवगत कराया गया कि पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन उत्तराखंड के अनुरोध पर नियम 53 के अंतर्गत पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन की मुख्य मांग पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को विधानसभा सत्र में रखा जा चुका है। जिस पर उक्त सत्र में इसकी चर्चा होना निश्चित है।
प्रांतीय अध्यक्ष पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन प्रांतीय महामंत्री श्री मुकेश रतूड़ी ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली की यह मांग अंतिम दम तक ,जब तक इस संगठन को जीत हासिल ना हो तब तक लड़ी जाएगी।
इस अवसर पर पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन उत्तराखंड की प्रांतीय कार्यकारिणी से प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्री शांतनु शर्मा , प्रांतीय संयुक्त मंत्री श्री पुष्कर बहुगुणा, जनपद देहरादून महामंत्री श्री प्रवेश सेमवाल आदि मौजूद थे

