सीएम सहित कई विधायकों ने नही दिया अपनी संपत्ति का ब्यौरा

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देहरादून। उत्तराखण्ड के ज्यादातर मंत्री और विधायक अपनी संपत्ति और आय का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। विधानसभा सचिवालय हर साल इन्हें अपनी आय में वृद्धि और कमी का ब्यौरा देने का रिमाइंडर तो देता है लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुख्यमंत्री समेत 47 विधायकों ने तो शपथ लेने के बाद तीन महीने में दिया जाने वाला संपत्ति का ब्यौरा तक नहीं दिया है। यह खुलासा एक आरटीआई में हुआ है.उत्तर प्रदेश मंत्री तथा विधायक (आस्तियों तथा दायित्वों का प्रकाशन) अधिनियम, 1975 ही उत्तराखंड में लागू होता है। इस अधिनियम की धारा 3(2) के अंतर्गत सभी विधायकों से यह आशा की गई है कि वह निर्वाचित होने के तीन महीने के अंदर अपनी संपत्ति का ब्यौरा विधानसभा सचिवालय को देंगे।
इसके अलावा इस अधिनियम के तहत यह भी आशा की गई है कि सभी विधायक और मंत्री हर साल 30 जून तक अपनी आय में वृद्धि या कमी के बारे में भी विधानसभा सचिवालय को जानकारी देंगे। एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में उत्तराखंड के मंत्रियों और विधायकों का रिकॉर्ड बेहद खराब है. वकील नदीम उद्दीन की आरटीआई के जवाब में विधानसभा सचिवालय से बताया गया कि मुख्यमंत्री और तीन मंत्रियों के साथ ही 47 विधायकों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है।
संपत्ति का ब्यौरा न देने वालों में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश भी शामिल हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के ही विधायक इस मामले में एक साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अलावा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और अरविंद पांडे के साथ राज्य मंत्री रेखा आर्य ने भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल उन विधायकों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति का ब्यौरा विधानसभा सचिवालय को दिया है। वह कहते हैं कि स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रणाली में अगर कोई व्यवस्था की जाती है तो उस अपनाने में कोई हर्ज नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष ने संपत्ति और आय का ब्यौरा देने की व्यस्था के बारे में कहा कि इससे पारदर्शिता आती है। उन्होंने आग्रह किया कि सभी विधायक अपनी संपत्ति का ब्यौरा दें।

देवभूमि खबर