अपने पद से इस्तीफा देता हूं
देहरादून । अपने पद से इस्तीफा देता हूं पार्टी कार्यकर्ता से होती है पार्टी से कार्यकर्ता नही पर आज की सोच यही है । पार्टी कार्यकर्ता को मजबूर समझती है । जो भी उपर के पद पर बैठता है नीचे के पद वाले को गुलाम समझ लेता है पार्टी के मालिक बन जाते है ।
शायद आज हमारी पार्टी की सोच बदल गई है पार्टी में लोकतंत्र की बात होती है पर लोकतंत्र नही है । मैं पार्टी के लोकतंत्र के हिसाब से किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता की सपोर्ट कर सकता हूं ।
जब किसी व्यक्ति विशेष को टिकट मिलता है तो उसके समर्थक मुझे झुकाने में लग जाते हैं परिवार का मतलब भूल जाते हैं सब का साथ सब का विकास जो पार्टी का नारा है उसे ही भूल जाते हैं ।
पार्टी एक परिवार होती है परिवार में मतभेद होते हैं पर परिवार में बड़े छोटे का लिहाज रहता है जब आपस का लिहाज खतम हो जाता है तभी परिवार बंट जाता है । मैं परिवारवाद के खिलाफ था टिकट काबिल कार्यकर्ता को मिलना चाहिए था । हरबंश कपूर जी मेरे आदर्श थे मेरी उनसे कई बार लड़ाई हुई जो एक बाप बेटे या बड़े भाई छोटे भाई में होती है और उन्होंने हरेक बार मुझे अपना समझा क्योंकि परिवार के बड़े होने का फर्ज जानते थे ।
पार्टी के लिए मेरे कई बड़े और छोटे भाइयों ने बहुत काम किया और काबिल भी थे । जिन्हे टिकट मिलना चाहिए था । आज विरोध की ताकत सिर्फ और सिर्फ दिनेश भाई ने दिखाई है इसलिए मैं भाई दिनेश रावत के समर्थन में पार्टी के अपने पद से इस्तीफा देता हूं और पार्टी के सभी बड़े और छोटे भाइयों से उन्हें जिताने की अपील करता हूं ।
मेरा इस्तीफा सिर्फ और सिर्फ उन भाइयों की सोच के खिलाफ जो पार्टी को अपनी जेब में समझते हैं ।

