नीचे उफनती नदी, ऊपर टूटी बल्लियों पर लटकती ‘जिंदगी’

नीचे उफनती नदी, ऊपर टूटी बल्लियों पर लटकती ‘जिंदगी’
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उत्तरकाशी
विनीत कंसवाल

उत्तरकाशी। आजादी के सात दशक बाद और राज्य गठन के 20 साल बाद भी दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।जहां बड़े-बड़े मंचों और बैठकों में कहा जाता है कि अंतिम छोर तक विकास पहुंच गया है, लेकिन हकीकत ठीक उलट है।इसकी बानगी मोरी तहसील के पांच गांवों में देखने को मिल रहा है।जहां ग्रामीण उफनती नदी के ऊपर टूटी हुई बल्लियों के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। यहां थोड़ी सी चूक और जिंदगी नदी में समा सकती है। इसके बावजूद हैरानी करने वाली बात ये है कि प्रशासनिक अधिकारी भी मामला ऐसा है तो दिखवा लेने की बात कह रहे हैं।
सांकरी-तालुका मोटर मार्ग हलारा गाड़ के पास बह गया है. लिहाजा, ओसला, गंगाड, पवाणी, ढाटमीर और श्रीगड़ के लोगों को बल्लियों के सहारे जान जोखिम में डालकर आवाजाही करना पड़ रहा है।

देवभूमि खबर

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