लोक साहित्य,कहानियां,गीतों एवं कला का मनुष्य के व्यक्तित्व विकास व चारित्रिक निर्माण में महत्वपूर्ण स्थान होता है :सुरेखा डंगवाल
देहरादून।शिक्षा एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के निर्देश पर आयोजित मातृभाषा दिवस वेबकास्ट के उदघाटन कार्यक्रम के अवसर पर दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने कहा कि लोक साहित्य, लोक कहानियां, लोक गीतों एवं लोक कला का मनुष्य के व्यक्तित्व विकास व चारित्रिक निर्माण में महत्वपूर्ण स्थान होता है और इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शन के लिए आवश्यक है । उन्होंने कहा कि तकनीकी युग में भाषा का विस्तार हुआ है प्रतीकात्मक भाषा से ऑनलाइन कंप्यूटर की भाषा का सफर हमने तय कर लिया है। भारत बहुभाषी देश है हमें लुप्त होती लोक भाषाओं व लोक कलाओं को संरक्षण एवं संवर्धन के लिए को आगे आना होगा। कुलपति ने कहा कि भाषाओं के ज्ञान के साथ ही उसकी संस्कृति, प्रकृति व परंपरा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ० मंगल सिंह मंद्रवाल ने बताया कि मातृभाषा दिवस के क्रम में 22 व 23 फरवरी को विश्वविद्यालय परिसर में सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में काव्य पाठ, एलिकयूशन, लोक संगीत, सुगम संगीत, नाटक आदि
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। जिसमे प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे।

