ह्यूमन राइट एसोसिएशन ने जल विद्युत निगम के अधिकारियों पर लगाया घोटालेबाजों को संरक्षण देने का आरोप
विकासनगर।देवभूमि खबर। ह्यूमन राइट्स एंड आरटीआई एसोसिएशन ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम के अधिकारियों पर घोटाले बाजों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।
एसोसिएशन अध्यक्ष अरविंद शर्मा व महासचिव भास्कर चुग ने कहा कि पराग जैन नामक फर्म ठेकेदार से यू जेवीएनएल ने अनुबंध 28-05-2019 पर 9 करोड़ 30 लाख 17 हजार रूपये का कार्य कराया जो 365 दिन में पूर्ण होना था, परंतु आश्चर्यजनक रूप से मात्र 21 दिन में यह कार्य पूर्ण होना दर्शा दिया गया। प्रश्न यह उठता है कि जिन अधिकारियों ने उक्त कार्य को पूर्ण करने की अवधि 1 वर्ष निश्चित की थी, क्या उनको इस बात की जानकारी नहीं थी कि उक्त कार्य मात्र 21 दिन की छोटी सी समय अवधि में पूर्ण हो सकता है?
यहां आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि यदि उक्त कार्य 21 दिन में पूर्ण हो सकता था तो इस हेतु 365 दिन की अवधि तय करने वाले अधिकारी क्या अनुभवहीन या ज्ञानशून्य हैं ? प्रश्न यह भी है कि क्या मात्र 21 दिन की अवधि में लगभग 20ः धनराशि का वेरिएशन हो सकता है और यह भी कि ठेकेदार ने उक्त कार्य हेतु रनिंग पेमेंट कब-कब कितने-कितने यूजेवीएनएल से ली या एकमुश्त भुगतान प्राप्त किया? जिसकी मात्रा 92911 किलोग्राम प्रयुक्त हुई दर्शाई गई है कहां से क्रय किया गया और मात्र 21 दिन में कैसे प्रयोग कर लिया गया? ठेकेदार पराग जैन पर यूजेवीएनएल की मेहरबानी देखिए कि अधिशासी अभियंता पशुलोक के हस्ताक्षर से एक ही अनुबंध 30-10-15 पर एक ही रकम के दो अलग-अलग कार्यों के अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए जो की दो अलग-अलग तिथि के दर्शाए गए हैं और ठेकेदार ने इन दोनों का प्रयोग में ठेके हासिल करने के लिए किया है। निगम के अधिकारी दोनों प्रकरणों पर लीपापोती कर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. एसोसिएशन दोनों प्रकरणों की जांच सीबीआई से कराने की मांग करती है। ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए एवं उसके साथ ही प्रथम दृष्टया दोषी अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग एसोसिएशन करती है।
