हमे अपने जीवन और पर्यावरण को जीवित रखना है तो अपनी सोच को बदलना होगा:चिदानन्द सरस्वती

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ऋषिकेश।देवभूमि खबर। परमार्थ निकेतन में हिमालय परिवार कार्यकारिणी का आज समापन किया गया। परमार्थ निकेतन में आयोजित दो दिवसीय हिमालय संरक्षण पर चिंतन, विवेचन और समाधान कार्यकारिणी के समापन अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती, भूपेन्द्र कंसल राष्ट्रीय महामंत्री हिमालय परिवार, वन्दना पाठक राष्ट्रीय महामंत्री, भुवन भट्ट सह सम्पादक और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने सहभाग किया। हिमालय संरक्षण, चिंतन व विवेचना समिट में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, मदन कौशिक और साध्वी भगवती सरस्वती ने हिमालय संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी विषय पर उद्बोधन दिया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि हमारे पास कोई दूसरा हिमालय और दूसरा ग्रह नहीं है जहां पर जीवन की सम्भावनायें हो, यहां तक की हमारे पास कोई वैकल्पिक योजना भी नहीं है। हमंे अपने जीवन और पर्यावरण को जीवित रखना है तो अपनी सोच को बदलना होगा। आज पूरे विश्व में जल, जंगल और जमीन को जो सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है वह है प्लास्टिक। प्लास्टिक ने समुद्रों और जंगलों को पाट दिया है। विश्व भर में लगभग 100 मिलियन टन कचरा महासागरों में पहंुच चुका है जिसका 80-90 प्रतिशत हिस्सा भूमि आधारित स्रोतों से आता है। जिससे बायोडायर्सिटी और ईकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार पता चला है कि पृथ्वी पर मौजूद पौधों एंव जन्तुओं की 8 मिलियन प्रजातियों में से 1 मिलियन प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है। उन्होने कहा कि पृथ्वी का बढ़ता तापमान, पिघलते ग्लेशियर, तेज मरूस्थलीकरण, घटते हुये वन क्षेत्र और जीव जन्तुओं का विलुप्त होने जैसी घटनायें जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही है और इससे हमारी आगे आने वाली पीढ़ियां भी प्रभावित हो सकती है। आईये हम सब मिलकर हमारे पास जो हिमालय रूपी धरोहर है उसे सहेजने की कोशिश करे।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक जी ने कहा कि हमें अपने पर्यटन को बढ़ाने के साथ पर्यावरण की, हिमालय और अपनी गंगा की रक्षा भी करना है। हमंे माँ गंगा की पवित्रता, सुन्दरता और सुचिता को बनायें रखने के लिये मिलकर कार्य करना होगा। उन्होने कहा कि हम विकास के लिये अगर एक पेड़ काटते है तो उसके स्थान पर 50 पौधों का रोपण करने की कोशिश करते है। साथ हम जितने पेड़ काटते है उससे दस या बीस गुना अधिक पेड़ लगाने का कार्य कर रहे है। मंत्री जी ने कहा कि हम हिमालय, गंगा और पर्यावरण की दृष्टि से विकास करते है। हिमालय परिवार की हिमालय के प्रति चिंता हमारे लिये प्रेरणा का स्रोत है हम आपके चिंतन पर अमल जरूर करेंगे।साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि हिमालय को संरक्षित करने तथा हिमालय के ईको सिस्टम को बनायें रखने के लिये पहाड़ों को ’’स्प्रिरिचुअल हब’’ में विकसित करना होगा। अमेजन के बाद हिमालय ही दुनिया को शुद्व प्राणवायु देने वाला दूसरा बड़ा स्रोत है तथा भारत में बहने वाली 11 प्रमुख नदियां हिमालय से ही निकलती है। हिमालय भारत के 65 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझाने का माध्यम है। हिमालय से प्राप्त अमूल्य वन सम्पदा और जड़ी-बूटी किसी न किसी रूप से विश्व के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। हिमालय भारत ही नहीं विश्व को भी प्राणवान बना रहा है। अतः हमें यह समझना होगा की हिमालय है तो हम है। हिमालय हमारा रखवाला ही नहीं प्राणदाता और जीवनदाता भी है। स्वामी जी ने हिमालय परिवार के सदस्यों को हिमालय की सुरक्षा के लिये एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करनें का संकल्प कराया।

इस अवसर पर राजी सिंह, जय किशन गुप्ता, जयंति ठाकुर, सुमेश लिलौटिया, डाॅ राकेश शर्मा, रवि त्यागी, मुनेश दहिया, राजेश बजाज, दमयंती रावत, सुधा शर्मा, राज शर्मा, अजय वाधवा, मीरा तोंगरिया, पुष्पा राजपूत, अभिषेक मिश्रा, सुशीला रावत, किरण त्यागी, तरूण जैन, राजेश अग्रवाल, उज्वल गोयल, वर्षा जैन, संजीव गुप्ता, आर्यन जैन, तरूण जैन, कैलाश जैन, महेश गोयल और अन्य सदस्यों ने सहभाग किया।

देवभूमि खबर

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