प्रवासियों को रोजगार की योजनाओं की जानकारी देने व प्रोत्साहित करने के लिए एक ब्रोशर बनाया गया है :जोत सिंह बिष्ट
मसूरी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते उत्तराखंड के प्रवासी वापस लौटे हैं तथा यहां रोजगार करना चाहते है, लेकिन उनको यहां की योजनाओं सरकार की कार्य पद्यति की जानकारी नहीं है, ऐसे में उनको योजनाओं की जानकारी देने व प्रोत्साहित करने के लिए एक ब्रोशर बनाया है जिसमें अधिकतम जानकारी उपलब्ध करायी गई हैं ताकि वे उसका लाभ उठा सकें।
मसूरी में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड की श्रम शक्ति है वह यहां रोजगार के साधन न होने के कारण बाहर दूसरे राज्यों में गये व कोरोना संक्रमण के होने पर वापस लौटे लेकिन चार माह से बेकार है। वह अब अपना उत्तराखंड में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। उन्हें यहां की सरकारी योजनाओं का ज्ञान नहीं हैं,ऐसे में राजनैतिक कार्यकर्ता होने व राज्य आंदोलनकारी होने के नाते उत्तराखं डमें जो स्वरोजगार की संभावनाएं है उस दिशा में लोगों को जानकारी देने के लिए एक ब्रोशर बनाया है जिसमें उन्हें योजनाओं के बारे में जानकारी देने, उन्हें प्रोत्साहित करने स्वरोजगार करने के लिए विभागीय अधिकारियों के नाम नंबंर और जो इस क्षेत्र में कार्य कर जिन्होंने उदाहरण प्रस्तुत किया उनके बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार के भरोसे न बैठकर वे स्वयं अपना रोजगार करे इस दिशा में कार्य करने का प्रयास किया है। व धनोल्टी विधान सभा माडल बने इसको ध्यान में रखकर कार्य कर रहे हैं व अभी तक चालीस गांवों का दौरा कर चुका हूूं। व उनका मार्ग दर्शन कर रहा हूं। गांव के लोगों को कह रहे हैं कि इनका मनोबल बढ़ाये। प्रवासी नौजवान उनकी बात सुन रहे हैं। उनके रोजगार के लिए लगातार आवाज उठाते रहे। वे जिस क्षेत्र में कार्य करना चाहते है उस दिशा में कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्हें नौकरी से स्वाभिमान करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इसका व्यापक परिणाम सामने आ रहे हैं इसे राजनीति से अलग अपने राज्य की भावी पीढ़ी को रोजगार से स्वावलंबी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने रोजगार के लिए एक पुस्तक प्रकाशित की लेकिन वह लोगों तक नही पहुंची लोंगोें को इसकी जानकारी नही है। सरकार की जिम्मेदारी थी कि योजना लाॅच करने के साथ उसको प्रचारित करने के साथ ही उन्हें सुविधायंे देने का प्रयास करना चाहिए। लेकिन राज्य में सरकार जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही अधिकारी हावी हैं। वहीं उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत सरकार के दूरसंचार मंत्री को पत्र लिखा है कि उत्तराखंड के तेरह जिलों में दूर संचार सेवा की स्थिति अत्यंत बदहाल है, बीएसएनएल से लेकर अन्य किसी भी प्राइवेट आपरेटर के मोबाइल सिम पर इंटरनेट सेवा के लिए उपभोक्ता से पैसा तो 4 जी का लिया जा रहा है, लेकिन नेट की स्पीड टू जी से 3जी की ही मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेट की स्पीड शून्य होने के साथ ही बातचीत करने के लिए कुछ गांवों में स्थान विशेष पर जाना पड़ता है। एक ओर सरकार डिजिटल इंडिया की बात कर रही है, ई गवर्नेंस और ई पंचायत की बड़ी चर्चा करती है लेकिन लोग फोन पर बात तक नही कर सकते। उन्हांेने मांग की कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों का व्यापक सर्वे करवाकर मोबाइल नेटवर्क की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करवाने हेतु संबंधित को आदेशित किया जाय।

