राज्य आंदोलनकारी भावना पाण्डे ने की अवैध खनन पर जांच की मांग

राज्य आंदोलनकारी भावना पाण्डे ने की अवैध खनन पर जांच की मांग
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  • वैध खनन न होने से सरकार को सात हजार करोड़ का नुकसान
  • मातृसदन को कैसे मिलती है जानकारी, इसकी भी हो उच्चस्तरीय जांच

देहरादून। राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि प्रदेश में वैध खनन न होने के कारण सरकार को हर साल 350 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। उनके मुताबिक पिछले 20 साल में सरकार को सात हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खनन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण वैध खनन नहीं होता है। और इसके पीछे सहारनपुर, पौंटा साहिब और हरियाणा के माफिया हैं। भावना का आरोप है कि मातृसदन माफिया के इशारे पर खनन कार्य में अड़चन डालता है। उन्होंने कि मातृसदन की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि प्रदेश खनन विभाग में कुछ अधिकारियों की अवैध खनन में लिप्त माफिया के साथ सांठ-गांठ है। इस कारण जब भी प्रदेश में खनन कार्य की शुरुआत होती है तो मातृसदन उससे पहले खनन कार्य रोकने के लिए खड़ा हो जाता है। प्रदेश में एक ओर से खनन की फाइल चलनी शुरू होती है तो उसकी समस्त जानकारी मातृसदन के पास होती है। उन्होंने कहा कि खनन विभाग में एक काॅकस चल रहा है जो खनन माफिया से मिला है और नहीं चाहता है कि प्रदेश में वैध खनन हो। अवैध खनन से उनकी कमाई होती है। भावना पांडे के मुताबिक दो अधिकारी खनन विभाग और दो अधिकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के हैं जो इस काॅकस मेें शामिल हैं।

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि मातृसदन की एक चिट्ठी पर खनन कार्य रोक दिया जाता है। उनके अनुसार वह हाईकोर्ट से खनन खोलने का आर्डर भी लेकर भी आई तो भी सरकार ने खनन नहीं शुरू किया। जबकि मातृसदन की एक चिट्ठी पर सरकार तुरंत कार्रवाई करती है। इसकी जांच होनी चाहिए कि कौन-कौन अधिकारी मातृसदन के साथ मिला हुआ है। ये लोग उत्तराखंड राज्य का हित नहीं चाहते। उन्होंन कहा कि मातृसदन को सभी दस्तावेज और जानकारियां कैसे मिल जाती हैं?
उन्होंने कहा कि हमें इस काकस को खत्म करना पड़ेगा। ये काॅकस हमारे राज्य के विकास के लिए खतरा है। उन्होंने सवाल किया कि प्रदेष सरकार को खनन कार्य शुरू करने के लिए सीपीसीबी की अनुमति नहीं थी। उस अपील में शासन से कोई नहीं जाता। वो चिट्ठी गायब हो जाती है। यह खनन विभाग के एक एडिशनल डायरेक्टर पंवार द्वारा गायब कर दी जाती है। चिट्ठी को दोबारा से मैंने चार अधिकारियों को भिजवायी। इसके बाद अनुमति मैं लेकर आई। उन्होंने कहा कि खनन विभाग में चल रहे इस काकस की जांच होनी चाहिए। इस बीच मातृसदन ने 17 पेज की चिट्ठी दे दी। खनन की फाइल में सरकारी कागजों से अधिक मातृसदन की चिट्ठियां हैं। आखिर मातृसदन को शासन के अंदरूनी मामलो की जानकारी कैसे मिल जाती है?

राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अपील की कि इस मामले की जांच कराएं। उन्होंने कहा जो गुनाहगार है मुख्यमंत्री उसे सजा दे वरना सब लोग सजा भुगतने के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि अनुमति के बावजूद पिछले दो साल से राज्य में खनन नहीं हो रहा है। इससे प्रदेश को भारी नुकसान पहुंच रहा है। सरकार को चाहिए कि वैध खनन शुरू करें ।

देवभूमि खबर

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