लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एल एम एस) से सुगम एवं रुचिकर होगा शिक्षण: प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल

लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एल एम एस) से सुगम एवं रुचिकर होगा शिक्षण: प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल
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देहरादून।दून विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय केन्द्रीय पुस्कालय द्वारा लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एल एम एस) तथा यूजीसी- इंफिलिपबनेट के साथ मिलकर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला के द्वारा दून विश्वविद्यालय ने अपने यहां चलने वाले विभिन्न पाठ्यक्रम की शैक्षिक गतिविधियों को उच्च स्तरीय बनाने के साथ-साथ ऑनलाइन करवाने की तैयारी की. एल.एम.एस. वर्तमान समय में एक महत्त्वपूर्ण पद्धति हो गई है तथा NAAC और NIRF के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी इसे लागू करने की बात की गई है. एल एम एस के अंतर्गत चार महत्वपूर्ण बिंदुओं के साथ-साथ शैक्षिक गतिविधियों को पूरा किया जाता है जैसे कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, स्टूडेंट्स का एसेसमेंट, डिस्कशन फोरम तथा शैक्षिक प्रपत्रों को अपलोड करना डाउनलोड करने की सुविधा प्रदान करना ।

इस कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने शैक्षणिक गतिविधियों के लिए एल एम एस की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने बताया कि दून विश्वविद्यालय ने एक ऑनलाइन स्टैंडर्ड एजुकेशन सिस्टम को लागू करने के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हुए अपना एक लर्निंग सिस्टम बना लिया है । इस ऑनलाइन एजुकेशन सिस्टम में शिक्षक और विद्यार्थी आपस मे जुड़कर बेहतर तरीके से एक दूसरे के साथ सामंजस्य बैठा पाएंगे। इस सिस्टम की मदद से अध्यापक पढ़ाने के लिए विषय सामग्री को तैयार करेंगे और इस सिस्टम में अपलोड कर देंगे और विद्यार्थी कभी भी इस अपलोडेड सामग्री को कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं । प्रोफेसर डंगवाल ने कहा कि इस सिस्टम के द्वारा विद्यार्थियों का एसेसमेंट भी किया जा सकता है और उनकी प्रोग्रेस को समय-समय पर आंका जा सकता है. साथ ही उन्होंने बताया कि नई टेक्नोलॉजी के आने से लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि टेक्नोलॉजी के द्वारा शिक्षकों का स्थान ले लिया जाएगा जबकि वास्तविकता यह है कि टेक्नोलॉजी के आने से शिक्षकों की क्षमता बढ़ेगी और परिणाम स्वरूप उनके ज्ञान का दायरा भी बढ़ेगा। जैसे कि यदि अमेरिका में कोई बेहतर शिक्षक है और वह हमारे संस्थान में पढ़ाना चाहता है तो वह इस तरह की टेक्नोलॉजी के माध्यम से जुड़कर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित कर सकता है. तकनीक का प्रयोग ज्ञान के संवर्धन को बढ़ाता है. कोरोना काल में अचानक से शैक्षणिक गतिविधियां ऑनलाइन हो गई थी और शिक्षकों को इस तरह का कोई भी प्रशिक्षण नहीं मिला था जिसके कारण से शिक्षकों को बहुत सी असुविधाएं हुई थी। पूर्व में हुए इस तरह के अनुभवों से विश्वविद्यालय को प्रेरणा मिली की तकनीक के साथ परिचय होना अति आवश्यक है ताकि एक बेहतर शैक्षणिक माहौल बने. जैसे कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए एक ही व्याख्यान के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होने के साथ-साथ, पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन, शैक्षणिक सामग्री को डाउनलोड या अपलोड करना, ऑनलाइन टेस्ट माध्यम से विद्यार्थियों की लर्निंग को जांचना, असाइनमेंट देना एवं जमा कराने के साथ ही उपस्थिति इत्यादि लगाना और आवश्यकता पड़ने पर डिजिटल रूप में पुनः क्लास को वर्चुअली अटेंड करना।

रिसोर्स पर्सन इनफ्लाइब्नेट के डॉ अभिषेक कुमार एवं डॉ बृजेश कुमार ने प्रोग्राम के बारे में विस्तार से चर्चा की और एल एम एस शिक्षण तकनीक पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इस विधि के उपयोग से शैक्षणिक गुणवत्ता एवं अनुशासन बेहतर ढंग से कायम हो सकेगा और विद्यार्थी अपने विषय वस्तु को रुचि के साथ सीखेंगे ।

कार्यक्रम विषय वस्तु की प्रस्तुति विश्विद्यालय पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ आशीष कुमार द्वारा किया गया । कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद प्रोफेसर एच सी पुरोहित के द्वारा किया गया उन्होंने कहा कि इससे शैक्षणिक गतिविधियां बेहतर होंगी।

कार्यक्रम के दौरान दून विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ एम एस मंदरवाल, प्रोफेसर आर पी मंमगाई, प्रोफेसर हर्ष डोभाल, डाँ राजेश कुमार, प्रोफेसर अंजली चौहान, डॉ सविता, डाँ विजय श्रीधर, डाँ ए आर गैरोला, डाँ कोमल, डाँ माला शिखा, डाँ चारु, डाँ हिमानी, डाँ दीपिका, डॉ स्मिता त्रिपाठी, डॉ राजेश भट्ट, डॉ धृति सहित सभी शिक्षक उपस्थित थे।

देवभूमि खबर

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