13 करोड़ की लागत से बना 50-बेड अस्पताल दलालों की भेंट; मोर्चा के दबाव में स्वास्थ्य सचिव ने दिए कार्रवाई के निर्देश
देहरादून। राजधानी देहरादून के डाकपत्थर क्षेत्र में लगभग 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ 50-बेड का संयुक्त चिकित्सालय भवन** वर्षों तक बंद पड़ा रहा। निर्माण तो पूरा हो चुका था, लेकिन भवन को स्वास्थ्य विभाग को हस्तगत करने की कार्यवाही जानबूझकर लटकाई जाती रही, जिससे यह जनता के उपयोग में नहीं आ पाया।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार से मुलाकात कर तत्काल अस्पताल को संचालित करने की मांग की। मोर्चा के प्रयासों पर संज्ञान लेते हुए सचिव ने महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य को दिनांक 8 जुलाई 2025 तक अस्पताल को शुरू करने संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत करने और आवश्यक मैनपावर की तैनाती के निर्देश दिए हैं।
नेगी ने बताया कि यह अस्पताल वर्ष 2021 में स्वीकृत हुआ था और लगभग एक वर्ष पूर्व उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम द्वारा निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया था। बावजूद इसके, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा इसे स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने में टालमटोल की गई।
नेगी का आरोप है कि विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में अधिकतर निर्माण कार्य केवल कमीशनखोरी के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।भवन, पुल या अस्पताल बन भी जाते हैं, लेकिन आम जनता को इनसे कोई सुविधा नहीं मिलती। जिम्मेदार लोग सिर्फ कमीशन डकार कर गायब हो जाते हैं।”
उन्होंने कहा कि मोर्चा की कोशिशों से 15 मई 2025 को अस्पताल भवन स्वास्थ्य विभाग को हस्तगत करवा दिया गया, किंतु अब भी सेवा शुरू होने में देरी हो रही है। यदि यह अस्पताल शुरू हो जाता, तो **विकासनगर उप जिला चिकित्सालय पर बोझ कम होता और *डाकपत्थर सहित आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों* को राहत मिलती।
मोर्चा ने स्वास्थ्य मंत्री पर भी उदासीनता का आरोप** लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की गईं, तो मोर्चा स्वास्थ्य मंत्री के आवास पर धरना देने से पीछे नहीं हटेगा।
नेगी ने कहा कि मोर्चा को विश्वास है कि जनता के हित में यह चिकित्सालय जल्द ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित किया जाएगा।

