परमाणु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी की जानकारी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण: डॉक्टर सीमा विनायक

परमाणु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी की जानकारी ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण: डॉक्टर सीमा विनायक
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देहरादून।दून विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग ने 7 दिसंबर 2023 को “संयुक्त परमाणु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी: अनुसंधान से उत्पादन तक” शीर्षक से एक वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार की वक्ता SSPL (डीआरडीओ) की पूर्व निदेशक डॉ सीमा विनायक रहीं।

डॉ. सीमा विनायक ने इस विषय पर मूल्यवान दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने संयुक्त परमाणु सेमीकंडक्टर की मूल बातें शुरू कीं, उनकी गुणधर्मों को, और यह कैसे सिंथित किए जाते हैं, इसका वर्णन किया। उन्होंने बताया कि इन सेमीकंडक्टर्स को विभिन्न क्षेत्रों में कैसे उपयोग किया जाता है, जैसे कि उन्हें उपकरणों के रूप में सेंसर्स, लेजर, एक्ट्यूएटर्स, पायजोइलेक्ट्रिक उपकरण इत्यादि के निर्माण में कैसे लागू किया जाता है। उन्होंने यह भी समझाया कि इन इलेक्ट्रॉनिक अध्ययनों के लिए कैसे विभिन्न सिमुलेशन उपकरणों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रक्षा में कैसे उपयोग किए जाते हैं, उदाहरण के तौर पर उच्च ऊँचाइयों पर हिम संघटन को महसूस करने में मदद करने वाले पायजोइलेक्ट्रिक उपकरण और इन सेमीकंडक्टर्स का उपयोग करके नकारात्मक गैसों की पहचान में मदद करने वाले गैस संवेदनशील उपकरणों के बारे में भी समझाया। इस प्रकार, उनका दृष्टिकोण इन संयुक्त परमाणु सेमीकंडक्टर उपकरणों के महत्त्व को समझाने के लिए था, विशेष रूप से रक्षा में।

उन्होंने भारत में रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सेमीकंडक्टर्स के वर्तमान परिदृश्य और इस क्षेत्र में भविष्य के दृष्टिकोण के बारे में मूल्यवान दृष्टिकोण प्रदान किया और कहां की इस तकनीकी का ज्ञान विज्ञान के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी आवश्यक है । इस आयोजन का व्यवस्थापन भौतिकी विभाग, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने कहा की विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को नूतन ज्ञान एवं नवोन्मेषी तकनीकी कौशल से परिपूर्ण करने की दिशा में सतत प्रयासरत एवं संकल्पित है यह कार्यक्रम उसी कड़ी का एक हिस्सा है।

भौतिकी विभाग की विभगाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. हिमानी शर्मा ने विभाग के कार्यक्रमों की जानकारी के साथ अतिथि का स्वागत किया । डॉ. विकास शर्मा और डॉ. खुशबू सिंह कार्यक्रम के सह-संयोजक ने धन्यवाद ज्ञापन एवं संचालन किया। कार्यक्रम में डॉ अर्चना मिश्रा, डॉ चारु द्विवेदी, डॉ इंदिरा, डॉ शिवानी वर्मा, डॉ हेमलता, अन्य शोधकर्ता और छात्र भी उपस्थित थे। इस आयोजन ने संयुक्त परमाणु सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ज्ञान और विचारों को साझा करने का अच्छा माध्यम साबित हुआ। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को नई दिशाएँ और संभावनाएं देखने को मिलीं। इस तरह के वेबिनार से विशेषज्ञों के अनुभव से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है ।

देवभूमि खबर

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