बाल भिक्षावृत्ति निवारण को समर्पित तंत्र विकसित: देहरादून बना राज्य का पहला आधुनिक इंटेसिव चाइल्ड सेंटर युक्त जिला

बाल भिक्षावृत्ति निवारण को समर्पित तंत्र विकसित: देहरादून बना राज्य का पहला आधुनिक इंटेसिव चाइल्ड सेंटर युक्त जिला
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देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में सोमवार को ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन व निवारण अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद के विभिन्न विभागों एवं संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। जिलाधिकारी ने कहा कि  मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन का तंत्र न केवल सशक्त हुआ है, बल्कि इसे नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए जिला प्रशासन इसे पूरी संजीदगी से आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक उत्तरदायित्व नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने धन व्यवस्था, शिक्षकों की नियुक्ति, रेस्क्यू टीमों, वाहन और एनजीओ से जुड़ी आसरा व्यवस्था को और विस्तार देते हुए इनके लिए सीधे दो साल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनपद को हर हाल में बाल भिक्षावृत्ति और बालश्रम से मुक्त करना है।

बैठक में बताया गया कि राजधानी देहरादून में राज्य का पहला अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इंटेंसिव चाइल्ड केयर सेंटर बनकर तैयार हो गया है, जिसमें अब तक 19 बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि दिसंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक कुल 174 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें:

  • बाल भिक्षावृत्ति में संलिप्त 47 बच्चे (40 बालक, 7 बालिकाएं)
  • बालश्रम में संलिप्त 47 बालक
  • कूड़ा बीनने में संलिप्त 72 बच्चे (62 बालक, 10 बालिकाएं)
  • अन्य 8 बच्चे (4 बालक, 4 बालिकाएं)

इन सभी बच्चों को इंटेंसिव केयर सेंटर में पंजीकृत किया गया है, जहां पर कुल 146 बाहरी छात्र (82 बालक और 64 बालिकाएं) भी सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं।

बैठक में गैर-सरकारी संगठनों – आसरा ट्रस्ट, समर्पण सोसाइटी और सरफीना ट्रस्ट से हुए एमओयू पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि जल्द ही RFT निकालकर मानकों के अनुरूप गृहों का विकास करें, जिसमें प्रशासन की निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने अंत में दोहराया कि बाल भिक्षावृत्ति और बालश्रम से मुक्ति की दिशा में यह एक नैतिक और सामाजिक आंदोलन है, जिसमें प्रशासनिक तंत्र अपनी पूरी क्षमता के साथ जुटा है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद ढौंडियाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, उप श्रमायुक्त दीपक कुमार, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष नमिता ममगाईं और विभिन्न एनजीओ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

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