स्वस्थ शरीर से स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता हैः कर्नल मयंक चैबे
देहरादून। दून यूनिवर्सिटी के दीक्षारंभ (ओरिएंटेशन) समारोह में नवप्रवेशित स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और करियर अवसरों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं, साथ ही वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य और उद्यमिता के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
स्वास्थ्य जागरूकता सत्र के दौरान कर्नल मयंक चैबे (सेवानिवृत्त), ग्लोबल एंबेसडर, भारत ने कहा कि, ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसरों में से एक है, लेकिन अगर इसे शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए तो इसका इलाज सफलतापूर्वक किया जा सकता है। नियमित सेल्फ-एग्जामिनेशन और समय-समय पर डॉक्टरों से चेकअप कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की भी प्रेरणा दी।
डॉ. निहारिका ने विद्यार्थियों को ब्रेस्ट कैंसर से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन करने से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने स्व-परीक्षण की विधि और नियमित मैमोग्राफी जांच के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
डॉ. प्रसूना ने कहा कि कई बार महिलाएं घर के काम के दबाव में शरीर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है। किसी भी असामान्य गांठ, दर्द या बदलाव को तुरंत मेडिकल जांच के लिए गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने महिलाओं एवं पुरुषों में कैंसर से जुड़े मिथकों और सच्चाइयों की जानकारी देकर विद्यार्थियों की भ्रांतियां दूर कीं। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और डॉक्टरों से अपने सवाल पूछकर ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दी और उन्हें एंटी-ड्रग के प्रति शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि नशे की प्रवृत्ति युवाओं को उनके लक्ष्य से भटका रही है, इसलिए स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए इस प्रवृत्ति का परित्याग आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए सुरक्षित, सहयोगी और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विश्वविद्यालय के सीआईआईईआईआर (CIIEIR) के सह-निदेशक डॉ. सुधांशु जोशी ने विद्यार्थियों को उद्यमिता (Entrepreneurship) और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्यमिता प्रकोष्ठ विद्यार्थियों को विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और बूट कैंप के माध्यम से तैयार करता है। इसके अलावा, ईडीआई (EDI) के साथ हुए समझौते के अंतर्गत विद्यार्थियों को ऐसे सभी अवसर प्रदान किए जाते हैं, जो उन्हें उद्योग, अकादमिक जगत और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने में सहायक होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे केवल नौकरी पाने के बजाय, स्वयं रोजगार सृजनकर्ता बनें।
मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ. राजेश भट्ट ने नए विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों के बीच कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं देखी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अत्यधिक पढ़ाई का दबाव, भविष्य को लेकर अनिश्चितता, परिवार की अपेक्षाएं, सामाजिक तुलना, आर्थिक तनाव और दोस्ती या आपसी संबंधों में तनाव जैसी परिस्थितियां छात्रों में एंग्जायटी, स्ट्रेस, लो सेल्फ-एस्टीम, डिप्रेशन, सोशल विदड्रॉल और अकेलापन जैसी समस्याओं को जन्म देती हैं। कुछ मामलों में सेल्फ-हर्म, नशे का सेवन और शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट भी देखने को मिलती है।
कार्यक्रम का संचालन सहायक छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. प्राची पाठक ने किया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एच.सी. पुरोहित ने किया। इस अवसर पर एंटी-ड्रग प्रकोष्ठ एवं जेंडर प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो. रीना सिंह, डीन स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज एवं सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. चेतना पोखरियाल, डॉ. हिमानी शर्मा, डॉ. अंकित नागर, डॉ. आबसार अब्बासी, डॉ. अजीत पंवार, डॉ. मानवेंद्र बर्तवाल, श्री प्रशांत मेहता सहित समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

