गोविंदघाट रेंज में वनाग्नि सक्रिय, फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित:सर्वेश दूबे

गोविंदघाट रेंज में वनाग्नि सक्रिय, फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित:सर्वेश दूबे
Spread the love

चमोली। जनपद चमोली के गोविंदघाट रेंज अंतर्गत लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदी के मध्य स्थित वन क्षेत्र के चट्टानी हिस्से में 9 जनवरी से अचानक वनाग्नि सक्रिय है। आग की सूचना मिलते ही वन विभाग के साथ जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा आग पर काबू पाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

वनाग्नि से प्रभावित क्षेत्र के दोनों ओर लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती नदियां प्रवाहित हो रही हैं, जिसके कारण फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान और हेमकुंड साहिब तक आग के पहुंचने की कोई संभावना नहीं है। फिर भी एहतियातन जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुरोध पर शासन द्वारा हेलीकॉप्टर से रैकी कर आग को बुझाने की योजना बनाई गई है।
डीएफओ सर्वेश दूबे ने बताया कि नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में घटित इस वनाग्नि की जानकारी 9 जनवरी को पहली बार प्राप्त हुई। इसके बाद पार्क प्रशासन द्वारा दो टीमों का गठन किया गया। एक टीम को अलकनंदा नदी पार कर ऐरा प्रथम बीट स्थित वनाग्नि स्थल भेजा गया, जबकि दूसरी टीम को वनाग्नि के विस्तार का आंकलन करने के लिए ड्रोन निगरानी हेतु तैनात किया गया। हालांकि क्षेत्र की अत्यधिक चट्टानी बनावट, खड़ी ढलान और ऊपर से पत्थर गिरने की आशंका को देखते हुए टीम की सुरक्षा के मद्देनज़र उन्हें वापस लौटना पड़ा।


10 जनवरी 2026 को लक्ष्मण गंगा नदी पर डांडीसाल के सामने अस्थायी पुल का निर्माण कर टीम भ्यूंडार द्वितीय बीट तक पहुंची, लेकिन रात्रि होने और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। 11 जनवरी को पुनः दो टीमें रवाना की गईं। पहली टीम भ्यूंडार द्वितीय बीट में जमे हुए झरने के नीचे तक पहुंची, जबकि दूसरी टीम ने ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से आग के विस्तार का आंकलन किया।


12 जनवरी 2026 को एक टीम भ्यूंडार होते हुए सिमरतोली तक पहुंची और रात्रि विश्राम भ्यूंडार में किया गया। 13 जनवरी को महिला मंगल दल पुलना, ग्राम प्रधान पुलना, ग्रामीणों एवं रेंज स्टाफ के संयुक्त प्रयासों से लक्ष्मण गंगा पर पुनः अस्थायी पुल बनाकर भ्यूंडार द्वितीय बीट में प्रवेश किया गया, लेकिन अत्यधिक विषम परिस्थितियों के कारण टीम को कुछ दूरी से वापस लौटना पड़ा। वर्तमान में वनाग्नि की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो रही है।

डीएफओ सर्वेश दूबे ने स्पष्ट किया कि वनाग्नि स्थल से फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान की हवाई दूरी लगभग 7 किलोमीटर तथा जमीनी दूरी करीब 22 से 25 किलोमीटर है। इन दोनों क्षेत्रों के बीच लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती जैसी दो प्रमुख नदियां बह रही हैं, जिनमें जल प्रवाह अत्यधिक है और चौड़ाई भी काफी विस्तृत है। ये नदियां प्राकृतिक फायर लाइन का कार्य कर रही हैं। इन भौगोलिक बाधाओं और दूरी को देखते हुए फूलों की घाटी या हेमकुंड साहिब तक आग के पहुंचने की संभावना शून्य है। पार्क क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है।


उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एवं शासन के सहयोग से आज वनाग्नि क्षेत्र का हेली-सर्वेक्षण किया जाएगा।

देवभूमि खबर

Related articles