भू-माफिया के खिलाफ जिला प्रशासन का बड़ा एक्शन, बरसाती नाले पर बनी 8 मीटर पक्की दीवार ध्वस्त

Spread the love

देहरादून भू-माफियाओं द्वारा सरकारी भूमि, जलस्रोतों एवं बरसाती नालों पर किए जा रहे अतिक्रमण और अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध जिला प्रशासन का सख्त एक्शन लगातार जारी है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के क्रम में उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी के नेतृत्व में ग्राम गल्ज्वाड़ी, तहसील देहरादून में बरसाती नाले पर किए गए अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया।

जिला प्रशासन को ग्राम गल्ज्वाड़ी में अवैध प्लाटिंग एवं सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के परीक्षण एवं स्थलीय निरीक्षण के उपरांत आज प्रशासनिक टीम द्वारा बरसाती नाले को पाटकर निर्मित लगभग 08 मीटर लंबी पक्की सुरक्षा दीवार को ध्वस्त कर दिया गया। साथ ही मौके पर की जा रही अवैध प्लाटिंग एवं निर्माण गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोकते हुए सरकारी भूमि व बरसाती नाले की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

गढ़ी कैंट घंघोड़ा क्षेत्र के निवासियों द्वारा अवगत कराया गया था कि जितेन्द्र मलिक पुत्र ब्रजपाल, मूल निवासी मुजफ्फरनगर तथा वर्तमान निवासी विजय पार्क, पॉकेट संख्या-3, कांवली, देहरादून (सेवानिवृत्त सिपाही) द्वारा ग्राम गल्ज्वाड़ी में लगभग 77 बीघा भूमि में अवैध प्लाटिंग की जा रही है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित व्यक्ति एवं उसके परिजनों के नाम भूमि दर्ज कर अवैध रूप से भू-विक्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ग्राम यदुवाला में लगभग 18 बीघा सरकारी भूमि तथा ग्राम पंचायत गल्ज्वाड़ी के मजरे खाबड़वाला स्थित लगभग 80 बीघा जलमग्न भूमि पर कब्जे के प्रयास का भी आरोप लगाया गया।

जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में राजस्व विभाग द्वारा स्थलीय एवं अभिलेखीय जांच की गई। भू-अभिलेखों के अनुसार खाता खतौनी संख्या 123 के अंतर्गत खसरा संख्या 1164, 1165, 1166, 1167, 1168, 1169, 1179, 1180, 1184, 1185 एवं 931क सहित कुल रकबा सहखातेदार कुनाल सिंह मलिक पुत्र जितेन्द्र मलिक एवं प्रिंस आनंद पुत्र देवेन्द्र आनंद के नाम दर्ज पाया गया। वहीं खाता खतौनी संख्या 65 के अंतर्गत खसरा संख्या 933क, रकबा 0.4490 हेक्टेयर भूमि धीरज भाटिया आदि के नाम भूमिधरी के रूप में दर्ज है।

स्थलीय निरीक्षण में पाया गया कि खसरा संख्या 933 एवं 1185 के मध्य खसरा संख्या 962क के रूप में दर्ज बरसाती नाला स्थित है, जिस पर संबंधित व्यक्तियों द्वारा लगभग 8 मीटर भूमि पर पक्की सुरक्षा दीवार का निर्माण कर बरसाती जल के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित किया गया था। इसके अतिरिक्त खसरा संख्या 1185, 1166 एवं 933 के मध्य दर्ज नाले की मूल प्रकृति में भी परिवर्तन पाया गया।

निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि उक्त खसरों में साल प्रजाति के वृक्ष विद्यमान हैं। वृक्ष पातन के साक्ष्य मौके पर नहीं मिले, जबकि वृक्षों के सूखने अथवा सुखाने के संबंध में वन विभाग द्वारा पृथक जांच की जा रही है। राजस्व निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि यद्यपि संबंधित व्यक्तियों द्वारा अपनी दर्ज भूमि पर प्लाटिंग की जा रही थी, किंतु बरसाती नाले की भूमि पर अतिक्रमण कर किया गया निर्माण पूर्णतः अवैध पाया गया, जिस पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक जलस्रोतों, नालों एवं सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग एवं भू-उपयोग परिवर्तन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने शिक्षा निदेशक से की वार्ता, शिक्षकों-कर्मचारियों की लंबित मांगों पर बनी सहमति

Spread the love अशासकीय माध्यमिक शिक्षक संघ उत्तराखंड का एक शिष्टमंडल आज प्रांतीय अध्यक्ष संजय बिजल्वाण एवं प्रांतीय महामंत्री महादेव मैठाणी के नेतृत्व में शिक्षा निदेशालय पहुंचा। शिष्टमंडल ने शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती से भेंट कर अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों के निस्तारण […]