डीबीएस पीजी कॉलेज के एनएसएस शिविर में प्री-वेडिंग काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जागरूकता सत्र
देहरादून ।डीबीएस पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर के अंतर्गत आज दैनंदिन कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य, संबंधों की समझ और प्री-वेडिंग काउंसलिंग विषय पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने युवाओं को जीवन के महत्वपूर्ण सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं के प्रति जागरूक किया।
मुख्य वक्ता के रूप में दून विवि के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश भट्ट ने अपने संबोधन में बताया कि बचपन और किशोरावस्था के दौरान मिलने वाले अनुभव व्यक्ति के व्यक्तित्व और संबंधों को गहराई से प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस दौरान हुए भावनात्मक आघात या ट्रॉमा समय रहते ठीक नहीं हो पाते, तो आगे चलकर यह व्यक्ति के रिश्तों, विश्वास और संवाद की क्षमता पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को समझना और भावनात्मक उपचार की प्रक्रिया को अपनाना बेहद जरूरी है।
देवभूमि विकास संस्थान के सचिव श्री सत्येन्द्र सिंह ने संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के संरक्षण में देवभूमि विकास संस्थान समाज में स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार परिवारों के निर्माण के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। संस्थान युवाओं के बीच संवाद, वैवाहिक जीवन की तैयारी और भावनात्मक समझ को बढ़ावा देने के लिए प्री-वेडिंग काउंसलिंग जैसे कार्यक्रमों पर विशेष रूप से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई वैवाहिक समस्याओं की जड़ संवाद की कमी और एक-दूसरे की अपेक्षाओं को न समझ पाना होता है। यदि युवाओं को विवाह से पहले सही मार्गदर्शन और समझ मिल जाए, तो भविष्य में कई पारिवारिक समस्याओं से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम में अधिवक्ता रवि नेगी ने प्री-वेडिंग काउंसलिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विवाह केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों, दो परिवारों और दो विचारधाराओं का मिलन होता है। उन्होंने बताया कि प्री-वेडिंग काउंसलिंग के माध्यम से होने वाले दंपति एक-दूसरे की अपेक्षाओं, जिम्मेदारियों और जीवन मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं, जिससे वैवाहिक जीवन अधिक संतुलित और सुदृढ़ बन सकता है।
एनएसएस राज्य कार्यालय से डॉ. सुनैना नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा अवस्था जीवन का ऐसा चरण है जहां लिए गए निर्णय भविष्य को दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, संवाद कौशल और पारिवारिक मूल्यों की समझ युवाओं के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शीतल कन्नोजिया और डॉ. बरखा कमल भी उपस्थित रहीं और उन्होंने शिविर में भाग ले रहे स्वयंसेवकों को सामाजिक जागरूकता और सेवा की भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने वक्ताओं से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। यह सत्र युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक रहा।

