न्याय तक आसान पहुंच पर मंथन, दो दिवसीय नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का देहरादून में समापन

देहरादून। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का देहरादून में समापन हो गया। “Enhancing Access to Justice” विषय और “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” थीम पर केंद्रित इस सम्मेलन में न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।
समापन सत्र में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायमूर्तिगण एवं विधि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता के स्वागत संबोधन से हुई। सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत करने, वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा और न्याय प्रणाली को अधिक सुलभ बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास तथा महिलाओं और बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई।
इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने ई-बुकलेट का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की सफलता तभी है जब अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध न्याय पहुंचे। उन्होंने “जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स” की अवधारणा पर जोर देते हुए न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने और बाधाओं को समाप्त करने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा और कारागार सुधार जैसे विषयों पर गंभीर मंथन समय की मांग है। उन्होंने NALSA की विभिन्न योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल वंचित वर्गों तक न्याय पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और डिजिटल केस मैनेजमेंट जैसे सुधारों से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार भी डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग के माध्यम से न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव देश और प्रदेश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

