दस साल से कागजों में सिमटी सड़क, डोली के सहारे अस्पताल पहुंचा ग्रामीण

दस साल से कागजों में सिमटी सड़क, डोली के सहारे अस्पताल पहुंचा ग्रामीण
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भैसियाछाना। उत्तराखंड राज्य गठन के वर्षों बाद भी विकासखंड भैसियाछाना का पतलचौरा गांव सड़क सुविधा से वंचित है। कनारीछीना-बिनूक-पतलचौरा सड़क मार्ग का मामला पिछले करीब दस वर्षों से सरकारी फाइलों में ही अटका हुआ है। सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को आज भी मरीजों को डोली के सहारे मुख्य सड़क और बाजार तक पहुंचाना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2016 में तत्कालीन विधायक रघुनाथ सिंह चौहान की पहल पर कनारीछीना-बिनूक-पतलचौरा सड़क मार्ग को स्वीकृति मिली थी। इसके बाद वर्ष 2021 में सर्वे एवं भू-विभाग द्वारा अर्थ टेस्टिंग तथा वन विभाग से एनओसी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण धरातल पर शुरू नहीं हो सका।

हाल ही में पतलचौरा निवासी कुंवर राम की तबीयत अचानक अधिक खराब हो गई। गांव में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को उन्हें डोली के सहारे कनारीछीना स्थित निकटतम बाजार तक पहुंचाना पड़ा। ग्रामीणों में किशन राम, बहादुर राम, प्रकाश राम, इंद्र कुमार, गोपाल राम, हिमांशु कुमार, दीपक कुमार, सूरज राम, गोकुल राम और जगदीश राम आदि ने डोली के माध्यम से कुंवर राम को कनारीछीना पहुंचाया।

रीठागाड़ी दगड़ियो संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह नेगी ने कहा कि ग्रामीण पिछले कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग को लेकर संबंधित विभागों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन फाइल एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक ही घूमती रही। करीब पांच किलोमीटर लंबी सड़क दस साल से अधर में लटकी है।

उन्होंने कहा कि सड़क नहीं बनने से पतलचौरा, चिमचुआ रीम, पिपलखेत और कनारी क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क निर्माण को लेकर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

देवभूमि खबर

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