गंगोत्री से बदरीनाथ तक सेवा की मिसाल, निरीक्षक देवेन्द्र रावत को भावभीनी विदाई

गंगोत्री से बदरीनाथ तक सेवा की मिसाल, निरीक्षक देवेन्द्र रावत को भावभीनी विदाई
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चमोली। पुलिस कार्यालय गोपेश्वर सभागार में बुधवार, 30 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार की उपस्थिति में अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत को भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके दीर्घ एवं गौरवमयी सेवाकाल को याद करते हुए स्वस्थ, सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत के पुलिस विभाग को दिए गए दीर्घकालीन योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में लंबे समय तक निष्ठा, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल विभागीय दायित्वों से होती है, समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भावना कभी समाप्त नहीं होती।

विदाई समारोह में निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत ने अपने सेवाकाल के संस्मरण साझा करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए भावुक होने के साथ गौरव का भी क्षण है। वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी पद पर चयनित होकर उन्होंने आरटीसी सहारनपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उनकी प्रारंभिक नियुक्ति उत्तरकाशी में हुई। नियुक्ति के तत्काल बाद उन्हें गंगोत्री धाम में एस्कॉर्ट ड्यूटी मिली। उन्होंने कहा कि उनके पुलिस जीवन का पहला दिन मां गंगोत्री के दर्शन से शुरू हुआ, जिसे वे अपना विशेष सौभाग्य मानते हैं।

इसके बाद उन्होंने थाना मनेरी और थाना बड़कोट में सेवाएं दीं। पुलिस सेवा के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की 100 मीटर राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में जनपद उत्तरकाशी का प्रतिनिधित्व किया और गढ़वाल रेंज का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त किया। उन्होंने विशेष शाखा, अभिसूचना विभाग उत्तरकाशी तथा गोविन्दघाट आतंकवाद निरोधक सेल में भी करीब तीन वर्ष सेवाएं दीं।

वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद उनका स्थानांतरण स्थानीय अभिसूचना इकाई रुद्रप्रयाग में हुआ। गौरीकुंड इकाई में करीब चार वर्षों तक यात्रा काल के दौरान सेवा करते हुए उन्होंने मां गौरी, बाबा केदारनाथ और त्रियुगीनारायण की पवित्र भूमि में भी दायित्व निभाया।

उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस की प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वर्ष 2006-07 में उनका स्थानांतरण देहरादून हुआ। यहां उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण चौकियों के प्रभारी के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2010 के महाकुंभ मेले के दौरान थाना चंद्रभागा क्षेत्र के थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान ऋषिकेश क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ में चंद्रभागा और शीशमझाड़ी क्षेत्र में फंसे श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों के बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कार्य के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूड़ी ने उन्हें “बेस्ट पुलिस ऑफिसर ऑफ यात्रा काल-2010” सम्मान से भी अलंकृत किया था।

इसके बाद उन्होंने हरिद्वार जनपद के विभिन्न महत्वपूर्ण चौकियों और थानों में प्रभारी के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2013-14 में लक्सर क्षेत्र की एक संवेदनशील घटना के दौरान संयम और पेशेवर पुलिसिंग का परिचय देते हुए बिना बल प्रयोग आरोपी को गिरफ्तार करने तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।

वर्ष 2022 में उनका स्थानांतरण पुनः पर्वतीय जनपद चमोली हुआ। उन्होंने श्री बदरीनाथ धाम कोतवाली में वरिष्ठ उपनिरीक्षक, थराली में थानाध्यक्ष तथा निरीक्षक पद पर पदोन्नति के बाद प्रभारी निरीक्षक थराली, कर्णप्रयाग और ज्योतिर्मठ के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि उनकी सेवा यात्रा मां गंगोत्री की पावन भूमि से शुरू हुई और भगवान बदरीविशाल की भूमि चमोली में पूरी हो रही है, इससे बड़ा सौभाग्य उनके लिए कुछ नहीं हो सकता।

सेवाकाल के दौरान निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत को चार सेवा पदकों के अलावा विभिन्न अवसरों पर प्रशस्ति-पत्र और सम्मान प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान जनता का विश्वास, वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन और सहकर्मियों का स्नेह रहा है। उन्होंने कहा कि वर्दी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी देती है। भय से नहीं, विश्वास से पुलिस की पहचान बनती है और ईमानदारी की राह कठिन होने के बावजूद वही सबसे सम्मानित मार्ग है।

उन्होंने महाभारत के सूत्र “धर्मो रक्षति रक्षितः” का उल्लेख करते हुए कहा कि जो धर्म और कर्तव्य की रक्षा करता है, वही अंततः स्वयं सुरक्षित रहता है। उन्होंने कहा कि वे पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन सेवा की भावना कभी सेवानिवृत्त नहीं होगी।

इसी अवसर पर हेड कांस्टेबल मोहन सिंह रावत को भी अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर भावभीनी विदाई दी गई। मोहन सिंह रावत 21 अप्रैल 2002 को कांस्टेबल पद पर पुलिस विभाग में भर्ती हुए और 30 दिसंबर 2022 को हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नत हुए। उन्होंने जनपद रुद्रप्रयाग और चमोली में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। इसके अलावा उन्होंने भारतीय सेना में भी सेवाएं दीं।
करीब 24 वर्ष 5 माह 9 दिन की पुलिस सेवा पूर्ण करने के बाद 30 सितंबर 2026 को वे सेवानिवृत्त हुए। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके सेवाकाल, कर्तव्यनिष्ठा और विभाग के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय और सम्मानपूर्ण भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत, पुलिस उपाधीक्षक कर्णप्रयाग त्रिवेन्द्र सिंह राणा, पुलिस उपाधीक्षक चमोली मदन सिंह बिष्ट सहित निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत के गृह क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधि, परिजन तथा पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

देवभूमि खबर

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