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गढ़भोज दिवस पर पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता, छात्र-छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा

गढ़भोज दिवस पर पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता, छात्र-छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा
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थत्यूड़। राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़, टिहरी में बुधवार को स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खानपान और पहाड़ी विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘गढ़भोज दिवस’ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ‘गढ़भोज पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया, जिसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को आकर्षक एवं सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अरबी के पत्तों और बेसन से तैयार पत्यूड़ व पटूंगी, गेहूं के आटे के गुलगुले, चावल के पापड़, झंगोरे की खीर, कद्दू के पत्तों से तैयार पारंपरिक व्यंजन सहित विभिन्न पहाड़ी पकवान प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने इन व्यंजनों में पाए जाने वाले विभिन्न पोषक तत्वों की जानकारी भी दी।

गढ़भोज व्यंजन प्रतियोगिता में बीए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा प्रिया नौटियाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतिष्ठा चमोली ने द्वितीय तथा सागर ने तृतीय स्थान हासिल किया। मुस्कान और अदिति ने संयुक्त रूप से सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर आदित्य कुमार मौर्य ने कहा कि गढ़भोज केवल पारंपरिक खानपान की संस्कृति नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।

प्रतियोगिता की संयोजक डॉ. गीता रावत शाह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत को समझने तथा उसे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं।

प्रतियोगिता में निर्णायकों ने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लेकर स्वाद एवं सुगंध, मसालों के संतुलन, स्वच्छता और पोषण के आधार पर मूल्यांकन किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों डॉ. भारती नौटियाल, डॉ. संगीता खडवाल, डॉ. चंदा नौटियाल, डॉ. अंचला, डॉ. नीरज असवाल सहित महाविद्यालय के कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

इस प्रकार पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों और लोक संस्कृति की खुशबू बिखेरते हुए ‘गढ़भोज दिवस’ का समापन हुआ।

देवभूमि खबर

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