सुर सरिता के मंच पर लोक संस्कृति की गूंज, विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियां ‘उत्कृष्ट गौरव सम्मान’ से सम्मानित

मां कैलादुंगी के गीत का हुआ विमोचन, निर्भीक पत्रकारिता के लिए वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल सिंघल को मिला सम्मान
देहरादून। सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था ‘सुर सरिता’ की ओर से रविवार को मौथरोवाला रोड स्थित श्रेष्ठ वेडिंग पॉइंट में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं ‘उत्कृष्ट गौरव सम्मान’ समारोह आयोजित किया गया। समारोह में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक विरासत की मनमोहक झलक देखने को मिली। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सिद्धपीठ मां कैलादुंगी के गीत का विमोचन रहा। लोक गायक मनमोहन बधानी ने गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में लोक संगीत की छटा बिखेरी। इस अवसर पर पत्रकारिता, लोक कला, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य मंत्री जोत सिंह बिष्ट उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में धर्मपुर विधायक विनोद चमोली और कांग्रेस नेता ओमप्रकाश सती ‘बब्बन’ ने शिरकत की। अतिथियों ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का संरक्षण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह में निर्भीक पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल सिंघल को ‘उत्कृष्ट गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। लोक कला के क्षेत्र में योगदान के लिए संतोष खेतवाल, करेनू बाला, बृज पंवार, प्रदीप पहाड़ी, गणेश और वीरेंद्र शर्मा को सम्मान प्रदान किया गया। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए गिरीश सकलानी और श्रीमती पूजा थापा को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि राज्य मंत्री जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोक संगीत प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। लोकगीतों में यहां की परंपराओं, जनजीवन और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करने से अन्य लोगों को भी समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
विशिष्ट अतिथि विधायक विनोद चमोली और कांग्रेस नेता ओमप्रकाश सती ‘बब्बन’ ने भी लोक संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक संस्थाएं लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम में सिद्धपीठ मां कैलादुंगी के गीत का विमोचन धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति के संगम का प्रतीक रहा। लोक गायक मनमोहन बधानी की प्रस्तुति ने समारोह को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर किया। गीत के माध्यम से मां कैलादुंगी के प्रति श्रद्धा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को संगीत के जरिए जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
संस्था ‘सुर सरिता’ पिछले 17 से 18 वर्षों से सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय है। संस्था के अध्यक्ष मोहन लाल, सचिव मनमोहन बधानी और संरक्षक ओमप्रकाश बधानी के नेतृत्व में संस्था लोक कला एवं परंपराओं के संरक्षण, सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है।
समारोह का समापन उत्तराखंड की समृद्ध लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाली प्रतिभाओं का सम्मान जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।


