भव्य रामलीला महोत्सव-2026 का लोक संस्कृति दिवस के रूप में आगाज, पंचतत्वा बैंड की प्रस्तुति ने मोहा मन

देहरादून। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित ‘भव्य रामलीला महोत्सव-2026’ का शुभारंभ श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में ‘लोक संस्कृति दिवस’ के रूप में हुआ। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित समारोह में उत्तरकाशी के युवा कलाकारों के ‘पंचतत्वा बैंड’ ने शानदार संगीतमय प्रस्तुति देकर हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, भव्य प्रकाश एवं ध्वनि प्रदर्शन ने आयोजन को और आकर्षक बनाया। महोत्सव के प्रथम दिवस कैलाश लीला तथा भगवान श्रीराम और माता सीता के जन्म का भव्य मंचन भी किया गया।
पंचतत्वा बैंड के कलाकारों ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति और मधुर धुनों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उत्तराखंड की माटी से जुड़े युवा कलाकारों को मंच प्रदान करने की इस पहल का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है।
समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि वर्ष 1952 से पुरानी टिहरी में आयोजित होती आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित कर उसकी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाया जा रहा है। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के इतिहास, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। इसी उद्देश्य से इस वर्ष महोत्सव के प्रथम दिवस को लोक संस्कृति दिवस के रूप में मनाया गया, ताकि प्रदेश के युवा कलाकारों और लोक संगीत को व्यापक मंच मिल सके।
अभिनव थापर ने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित भव्य रामलीला महोत्सव को विभिन्न माध्यमों से 82 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। दर्शकों के स्नेह और विश्वास से प्रेरित होकर इस वर्ष आयोजन को और भव्य स्वरूप दिया गया है। लोक संस्कृति, पारंपरिक प्रस्तुतियों और आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि प्रदर्शन के संगम के साथ डिजिटल सीधा प्रसारण के माध्यम से इस वर्ष एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक विरासत, गढ़वाल के गौरवशाली इतिहास और सनातन परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाना है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री खजान दास ने कहा कि पुरानी टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में पुनर्जीवित करना उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। लोक संस्कृति और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने से प्रदेश की पारंपरिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगी।
विधायक विनोद चमोली ने ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महोत्सव के अंतर्गत 8 से 25 अक्टूबर तक भव्य मेले और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। रामलीला का मंचन 11 से 21 अक्टूबर तक होगा। 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा, जबकि 21 अक्टूबर को भगवान श्रीराम के राजतिलक का आयोजन होगा।
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष अभिनव थापर, मंत्री खजान दास, विधायक विनोद चमोली, पंचतत्वा बैंड के संस्थापक अनुराग नौटियाल, अरविन्द चौहान, प्रदीप पंचोला सहित अन्य कलाकार, समिति पदाधिकारी, पार्षद वीरेंद्र बिष्ट, जावेद आलम, राज्य आंदोलनकारी शाहिद तथा बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।


