अल्मोड़ा के जंगलों में खिला बुरांश, औषधीय गुणों से भरपूर फूल बना आकर्षण
अल्मोड़ा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों और ठंडे जंगलों में इन दिनों बुरांश के फूल खिलने लगे हैं, जिससे पहाड़ों की वादियां लाल रंग से सराबोर हो गई हैं। बुरांश, जो उत्तराखंड का राज्य वृक्ष है, फरवरी से लेकर अप्रैल-मई तक जंगलों में प्रचुर मात्रा में खिलता है। यह वृक्ष उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, नेपाल और भूटान के पहाड़ी क्षेत्रों में भी पाया जाता है।
बुरांश का फूल अपनी सुंदरता के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसके फूलों का जूस तैयार किया जाता है, जिसे बनाने के लिए फूलों को साफ कर उबालने के बाद उसमें चीनी, नींबू और काली मिर्च मिलाई जाती है।
अल्मोड़ा निवासी प्रताप सिंह नेगी के अनुसार, गर्मियों में बुरांश का जूस न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह जूस गठिया, सूजन, अस्थमा, एलर्जी, एनीमिया, पाचन संबंधी समस्याओं, लीवर और त्वचा रोगों में सहायक माना जाता है।
स्थानीय लोगों के बीच बुरांश का उपयोग लंबे समय से पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है, जिससे इसकी उपयोगिता और महत्व और भी बढ़ जाता है।

